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जिले की पंचायतों में बनेंगे 2246 अमृत सरोवर

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जिले की पंचायतों में बनेंगे 2246 अमृत सरोवर
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बिजनौर। जिले में 2246 मुख्यमंत्री अमृत सरोवर बनेंगे। हर पंचायत में दो अमृत सरोवर होंगे। अमृत सरोवर ऐतिहासिक धरोहर के रूप में विकसित होंगे। प्रशासन ने अमृत सरोवरों के लिए पंचायतों में स्थान चयन समेत अन्य प्रक्रिया शुरू कर दी है।
वर्ष 2021-22 में जल संचयन के लिए खूब काम हुए। गांवों में नये तालाब खोदे गए। पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार हुआ। घरों से निकलने वाले पानी व गली मोहल्लों की गंदगी को तालाबों में जाने से रोका गया। तालाबों में जल का क्षरण रोकने के लिए बाड़बंदी की गई। गांवों में सूखे पड़े रहने वाले तालाबों में जल भरा रहने लगा है। अब मुख्यमंत्री हर पंचायत में दो अमृत सरोवर बनाने का एलान किया है। जिले में 1123 ग्राम पंचायत हैं। इस प्रकार जिले में 2246 अमृत सरोवर बनेंगे। अमृत सरोवर ऐतिहासिक धरोहर के रूप में विकसित होंगे। अमृत सरोवर पंचायतों को बनाने है।
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ये हैं शासन के निर्देश
शासन ने मुख्यमंत्री अमृत सरोवर बनाने के लिए निर्देश जारी किए हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार अमृत सरोवर पंचायत से कुछ दूरी पर बनेंगे। अमृत सरोवर निर्माण के लिए एक एकड़ से अधिक जमीन हो। निर्माण पंचायत व मनरेगा के सहयोग से होगा। निर्माण शासन के वित्त आयोग से मिले पैसे से होगा। डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री अमृत सरोवरों के निर्माण के लिए स्थान चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अमृत सरोवरों का निर्माण सरकारी जमीनों पर होगा।
ये सुविधाएं मिलेंगी
शासन के निर्देश हैं कि अमृत सरोवर गहरे खोदे जाएं। जिससे जल की अधिक उपलब्धता रहे। बताया की अमृत सरोवर के चारों ओर चबूतरा बनेगा। जिस पर पैदल भ्रमण किया जा सके। भ्रमण करने वाले लोगों को छाया उपलब्ध कराने के लिए पेड़ लगाए जाएंगे। लोगों के बैठने तथा विश्राम के लिए सामुदायिक भवन बनेगा। सामुदायिक शौचालय का निर्माण होगा। अमृत सरोवर में नौकायन के लिए नाव आदि की व्यवस्था रहेगी। अमृत सरोवर ऐतिहासिक स्थल के रूप में विकसित होगा।
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निर्माण को लेकर पंचायत पशोपेश में
पंचायत मुख्यमंत्री की अमृत सरोवर निर्माण की योजना को अच्छा फैसला बता रही हैं। साथ ही निर्माण के लिए पैसे की उपलब्धता को लेकर चिंतित हैं। प्रधानों का तर्क है कि वित्त आयोग से जो पैसा मिलता है, उसमें से करीब तीन लाख पंचायत सहायक, प्रधान, सामुदायिक शौचालयों के केयरटेकर आदि के मानदेय व बिजली, पानी के बिल भुगतान पर खर्च हो जाता है। पंचायत घरों का निर्माण, सीसी रोड, शौचालय, आदि करीब एक दर्जन निर्माण पर भी वित्त आयोग का पैसा ही व्यय होता है। पंचायतों के पास अतिरिक्त आय के श्रोत नहीं है। ग्राम प्रधानों का कहना है कि शासन अमृत सरोवरों के निर्माण के लिए अलग से बजट आवंटित करें। मनरेगा विभाग के सूत्रों के अनुसार मनरेगा में काफी समय से बजट नहीं आया है।
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