कवियों ने राजनीतिक व्यवस्था पर कसे तंज
बिजनौर। कवितालोक त्रिशतकीय महाकुंभ की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन में देशभर से आए 115 कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था पर जमकर तंज कसे। इस अवसर पर आयोजक वरिष्ठ कवि मनोज मानव की दो पुस्तकों छंदानुगामिनी और गीतिकामृत का भी विमोचन किया गया।
सोमवार को नगर के एक बैंक्वेट हॉल में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अखिल भारतीय डिप्लोमा इंजीनियर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुधीर पंवार ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुख्य अतिथि ने कहा कि साहित्य समाज का सच्चा मार्गदर्शक है। बिना साहित्य के समाज विकसित नहीं हो सकता है। कविता लोक के मुख्य संरक्षक आचार्य ओम नीरव ने कहा कि कविता लोक निरंतर साहित्यिक अभिवृद्धि हेतु नित नए प्रयोगों में जुटा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार मधुकर अस्थाना ने व संचालन निधि शुक्ला ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य ओम नीरव, डॉ. अनिल मिश्र, देवी पंथी (नेपाल), रवा राजपूत महासभा के राष्ट्रीय महासचिव ओमीलाल, पत्रकार पंकज भारद्वाज, अनमोल शुक्ल अनमोल, शकील अहमद बिजनौरी, डॉ. अजय प्रसून, इंद्रदेव भारती, डॉ. अजय जनमेजय, डॉ. साधना जोशी प्रधान, राहुल शिवाच आदि मौजूद रहे।
इन कवियों ने किया काव्यपाठ
नेपाल से आए खगेंद्र भट्टराई, अवनीश त्रिपाठी, उमाकांत पांडेय, धीरज श्रीवास्तव, सुनील त्रिपाठी, डॉ. अनिल शर्मा अनिल, डॉ. राहुल द्विवेदी स्मित, साधना जोशी, पंकज परिमल, रमेशचंद्र माहेश्वरी, रचना शास्त्री, दीपक गोस्वामी, कुंदन उपाध्याय, अजय प्रसून, श्याम फतनपुरी, अर्चना गुता, हरीशचंद्र लोहुमी, मिजाज लखनवी सहित 115 कवियों ने काव्यपाठ किया। सभी कवियों को शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।