130 टीम करेंगी सामुदायिक शौचालयों की जांच
बिजनौर। शासन पंचायतों में राज्य व केंद्रीय वित्त आयोग की धनराशि से हुए निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सख्त हो गया है। इसलिए अब पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बने सामुदायिक शौचालयों के गुणवत्ता की जांच होगी। डीएम उमेश मिश्रा ने असलियत का पता लगाने के लिए जांच में 130 जिला स्तरीय अधिकारी लगाए हैं। शासन से जांच के बिंदु तय हैं।
पंचायतों को राज्य व केंद्रीय वित्त आयोग से विकास कार्यों के लिए मोटी रकम मिली है। धनराशि से पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत सामुदायिक शौचालय बने हैं। जिस गांव की आबादी 1000 से 1500 तक है, वहां साढ़े लाख की लागत से चार शीट वाला तथा 1500 से अधिक आबादी वाली पंचायत में साढ़े छह लाख की लागत से छह शीट वाला शौचालय बना है। आरोप है कि शासन को सामुदायिक शौचालय की निर्माण गुणवत्ता को लेकर शिकायत मिल रही थी। जिस पर शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। डीएम उमेश मिश्रा ने सामुदायिक शौचालय की गुणवत्ता की जांच के लिए न्याय पंचायत वार 130 जिला स्तरीय अधिकारियों को लगाया है। हर जांच अधिकारी के साथ एक तकनीकी अधिकारी सहायक अभियंता या जूनियर इंजीनियर को लगाया गया है। जिले में 1123 ग्राम पंचायत हैं। हर ब्लॉक में 10 से लेकर 17 तक टीम लगी हैं। केवल अफजलगढ़ व किरतपुर ब्लॉक में आठ टीम हैं। जांच रिपोर्ट सात दिन में डीपीआरओ को सौंपने के लिए कहा गया है।
ये है सत्यापन के बिंदु
शासन ने सामुदायिक शौचालयों की जांच के बिंदु तय कर दिए हैं। जांच विभिन्न प्रकार के 18 बिंदुओं पर होनी है। इनमें सामुदायिक शौचालय के निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता की जांच, शौचालय सक्रिय है या नहीं, दिव्यांगो के लिए समुचित व्यवस्था है या नहीं, सेनीटेशन की फिटिंग , बिजली का कनेक्शन, रखरखाव, साफ सफाई नियमित होती है या नहीं, पानी की व्यवस्था है या नहीं, रोजाना औसतन कितने व्यक्ति शौचालय का इस्तेमाल कर रहा है, आदि प्रमुख बिंदु हैं।
रखरखाव के लिए आवंटित पैसे की भी होगी जांच
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वच्छ भारत महत्वाकांक्षी अभियान है। पंचायतों में सामुदायिक शौचालय स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत लाखों की लागत से बने हैं। शासन की मंशा है कि कोई भी ग्रामीण शौच के लिए खुले में नहीं जाए। इसलिए शौचालय की देखरेख पर विशेष जोर है। शासन ने सामुदायिक शौचालयों के देखरेख की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को सौंपी है। समूह को साफ सफाई के लिए हर माह 9000 रुपये दिए जाते हैं। इस पैसे से समूह को सफाई का सामान खरीदना है। जांच टीम को यह पता लगाना है कि समूह को पैसा मिलने की जानकारी है या नहीं। समूह को पैसा मिल रहा है या नहीं।