बिजनौर। यदि सब कुछ ठीक रहा तो किसानों के खेतों में सूखी पत्ती वाला गन्ना नजर नहीं आएगा। इस बीमारी से निपटने के लिए स्योहारा शुगर मिल ने संयंत्र तैयार किया है। संयंत्र में गन्ने के बीज का जल उष्मा विधि से उपचार किया जाता है। गन्ना विभाग प्रत्येक गांव के दस-दस किसानों को उपचारित बीज मुफ्त बांट रहा है।
डीसीओ ओपी सिंह के अनुसार गन्ने में ग्रासी सूट बीमारी लगने की शिकायत मिल रही थी। इस बीमारी में गन्ने की पत्तियां सूख जाती हैं। यह बीमारी जड़ तक पहुंचकर गन्ने को सुखा देती है। यह बीमारी गन्ने की प्रजाति 238 में अधिक लगती है। जिले में 238 गन्ना सबसे अधिक बोया जाता है। इस कारण किसान को काफी आर्थिक नुकसान हो रहा है। अधिक उत्पादन देने वाली इस प्रजाति को बचाना जरूरी है। ग्रासी सूट बीमारी से बचाव के लिए स्योहार शुगर मिल ने माइस्ट हीट एयर ट्रीटमेंट अर्थात एमएचएटी संयंत्र तैयार किया है। संयंत्र में गन्ने की बीज डालकर 54 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जाता है। यह क्रम दो घंटे तक चलता है। एक बार में 25-30 क्विंटल बीज का उपचार हो जाता है। पूरा सिस्टम आटोमेटिक है। डीसीओ के मुताबिक इस समय शरदकालीन गन्ने की बुवाई चल रही है। विभाग गन्ना समितियों के माध्यम से हर गांव के 10-10 किसानों को बीज बांट रहा है। इसके अतिरिक्त यदि कोई किसान उपचारित बीज लेना चाहता है तो स्योहारा मिल सप्लाई करेगा।