जिले में छात्राओं और नाबालिगों के नाम से भी गेहूं की खरीद की गई है। वह भी दो-चार या दस हजार रुपये की नहीं बल्कि तीन-तीन लाख की। ताजा मामला बीते वर्ष हुई गेहूं खरीद में सामने आया है। तीन लाख से अधिक धान या गेहूं बेचने वालों का राशनकार्ड निरस्त करने के लिए जब शासन से सूची जारी हुई और आपूर्ति विभाग ने सत्यापन शुरू किया तो इसका पर्दाफाश हुआ। खुलासे से जहां अधिकारी सकते में हैं तो वहीं जिनके नाम से खरीद की गई है वह भी चिंतित हैं।
सुरियांवा क्षेत्र के कुसौड़ा गांव निवासी प्रतिमा की उम्र 20 वर्ष की है। वह स्नातक की छात्रा है। इनके पिता रमाशंकर अखबार बांटते हैं। अभिलेखों के अनुसार प्रतिमा के नाम से तीन लाख दो हजार रुपये से ज्यादा की खरीद की गई है। रमाशंकर कहते हैं कि पुत्री को छोड़िए मेरे पास इतना नहीं है कि इतने रुपये का गेहूं बेच सकूं। इसी तरह इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने वाले रमाकांत के पुत्र आलोक के नाम से भी चार लाख 43 हजार रुपये की खरीद दिखायी गई है। महज 13 वर्ष के अंकित के नाम से भी चार लाख 45 हजार रुपये की खरीद की गई है। कुसौड़ा के ही विजय कुमार, मुकेश, अनुराग श्रीवास्तव सहित 12 ऐसे लोग हैं जिनके आधार नंबर पर खरीद की गई है। खरीद कागजात में मोबाइल नंबर किसी का है तो आधार नंबर और खाता नंबर किसी और का।
कुसौड़ा गांव में बीते दिनों जांच करने गए पूर्ति निरीक्षक ने जब पड़ताल शुरू की तो खेल का पता चला। बिचौलियों व व्यापारियों ने सामान्य और भोले-भाले लोगों का आधार नंबर लेकर उनके नाम से पंजीकरण किया और उसी से खरीद कर ली। इसमें क्रय केंद्र प्रभारियों की मिलीभगत से धनराशि किसी और खाते में मंगा ली गई। पूर्ति निरीक्षक विनोद विश्वकर्मा ने बताया कि आधार कार्ड के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी जाएगी। कहा कि कुछ के तो खाते में पैसे आए, लेकिन बिचौलियों ने वापस ले लिया, कुछ को पता ही नहीं है। यह कैसे हुआ जांच का विषय है।
जिन किसानों ने तीन लाख रुपये या उससे अधिक का अनाज बेचा है उनकी लिस्ट आपूर्ति विभाग के पास आ गई है। ऐसे लोगों का राशनकार्ड निरस्त किया जा रहा है। माना जा रहा है कि जिन लोगों ने तीन लाख रुपये का अनाज बेचा है वह संपन्न हैं और सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से राशन लेने के लिए पात्र नहीं हैं। जिले के कुल 887 लोगों की सूची आई है। उसका सत्यापन आपूर्ति विभाग करवा रहा है। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि पंजीकरण के बाद पीएफएमएस से धनराशि खाते में भेजी जाती है। इस तरह की गड़बड़ी कहां से और किस स्तर से की गई है इसकी जांच करायी जाएगी। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।