गंगा का जलस्तर बढ़ने से सीतामढ़ी घाट तक पहुंचा पानी। संवाद
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सीतामढ़ी। दो दिन जलस्तर स्थिर होने के बाद बुधवार की रात से एक बार फिर बढ़ने लगा है। तेेजी से बढ़ रहे पानी से कोनिया के किसानों की धड़कन बढ़ा दी है। बृहस्पतिवार को दोपहर बाद तक जलस्तर 77 मीटर से अधिक पहुंच गया।
तीन ओर गंगा से घिरे जनपद का कोटिया क्षेत्र गंगा बाढ़ की दृष्टि से अतिसंवेदनशील है। बाढ़ आते ही इटहरा,मवैयाथान सिंह, छेछुआ और भुर्रा गांव में किसानों की उपजाऊ जमीन तेज धारा से कट कर गंगा में विलीन होने लगती है। प्रदेश सरकार ने छेछुआ और भुर्रा गांव में इसी वर्ष गंगा कटान रोकने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से नई तकनीकी वाले जियो टेक्सटाइल ट्यूब कटर को गंगा के ढाई किलोमीटर क्षेत्र में लगवाया है, लेकिन वह भी कारगर साबित नहीं हो रही है। जुलाई माह के अंतिम दिनों से गंगा के जलस्तर में वृद्धि शुरू हुई।
सोमवार को गंगा का पानी 75 मीटर से अधिक हो गया। मंगलवार और बुधवार को जल स्तर में लगभग आधा मीटर की कमी के साथ स्थिरता आ गई, लेकिन बुधवार रात में जल स्तर में भारी बढ़ोतरी शुरू हो गई। बृहस्पतिवार सुबह गंगा की तेज धारा सीतामढ़ी गंगा घाट के पक्की सीढ़ी तक पहुंच गया। गंगा की तेज धारा ने गंगा कटान वाले क्षेत्रों के लोगों की बेचैनी बढ़ा दी है। सीतामढ़ी गंगा में स्थापित मीटर गेज पर दिन में 12 बजे जल स्तर 77.180 मीटर पर पहुंच गया। केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी मीटर गेज कार्यालय के अनुसार 12 सेंमी.प्रति घंटे की तेज रफ्तार से बढ़ रहा जल स्तर पिछले वर्ष के अधिकतम 76.460 मीटर के रिकार्ड को दिन में 3 बजे पार कर लिया। जबकि खतरे का निशान 80 मीटर है।