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आदेश का नहीं दिखा असर, अधिकतर केंद्र मिले बंद

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बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के निदेशालय के स्तर से आए आंगनबाड़ी केंद्रों को खोले जाने संबंधी आदेश का सोमवार को पूरी तरह से पालन नहीं हो सका। सोमवार को विभागीय उदासीनता की पोल खुल गई। अधिकतर केंद्रों पर ताला लटके मिले। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से लेकर सहायिका तक नदारद रहीं। इसके चलते केंद्रों पर बच्चे भी नहीं दिखे।
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आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती धात्रियों और बच्चों को पोषणयुक्त पोषाहार सहित अन्य जरूरी सामान वितरित किए जाते हैं। जिले में 1492 आंगनबाड़ी केंद्रों पर जीरो से पांच वर्ष तक के एक लाख 74 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। कोरोना संक्रमण के कारण वर्ष 2020 से आंगनबाड़ी केंद्र करीब दो साल तक बंद रहे। संक्रमण की स्थिति सामान्य होने पर सोमवार को केंद्रों को खोलने का आदेश दिया गया था। इस बीच आदेश के बावजूद कई आंगनबाड़ी केंद्र नहीं खुले। केंद्रों पर ताला लटका रहा। कई ग्राम पंचायतों में दो से तीन केंद्र तक भी बंद मिले। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से लेकर सहायिका तक अनुपस्थित रहीं। इसको लेकर ग्रामीणों में नाराजगी भी दिखी। सोमवार को हकीकत जानने अमर उजाला की टीम अभोली के कुढ़वा, शेरपुर और भानीपुर स्थित आठ केंद्रों पर पहुंची। सभी केंद्रों पर ताला लटका मिला। भानीपुर में तो केंद्र के आसपास गंदगी मिली। कमोवेश यही स्थिति अन्य केंद्रों पर भी रही। गिने-चुने केंद्र छोड़ दिए जाएं तो अधिकांश की स्थिति ठीक नहीं मिली।
प्रभारी डीपीओ मंजू वर्मा का कहना है कि अभोली के आंगनबाड़ी केंद्र पर तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चुनाव ड्यूटी का पत्र लेने के लिए विकास भवन गई थीं, इससे केंद्र बंद मिले। करीब दो साल बाद केंद्रों का संचालन शुरू हुआ है। दो से तीन दिन में स्थिति सुधर जाएगी।
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