दो अलग-अलग मामलों में सुनवाई के बाद न्यायाधीशों ने बुधवार को तीन आरोपियों को दस-दस साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही तीनों पर अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर कुछ अतिरिक्त सजा भी भुगतनी पड़ेगी। ये मामले अपहरण कर मारपीट करने और दुष्कर्म से जुड़े हैं।
पहला मामला अपहरण कर मारपीट करने का है। अधिवक्ता के अनुसार 23 वर्ष पूर्व हुए अपहरण और मारपीट के मामले में सुनवाई के बाद दो आरोपितों को 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपये अर्थ दंड की सजा अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत ने सुनाया है। वादी मुकदमा आशा देवी ने इस आरोप के साथ मुकदमा दर्ज कराया था कि उनके दामाद आशुतोष कुमार को आरोपितों ने अपहरण कर मारापीटा। इस मामले में विवेचना के बाद आरोपितों के खिलाफ अपहरण और मारपीट के मामले में चार्जशीट दाखिल हुई थी। घटना के समर्थन में अभियोजन की ओर से गवाहों को परीक्षित कराया गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम पीएन श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी नईम अहमद, राजेश तिवारी निवासी मिर्जापुर को दोषी पाते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का निर्देश दिया। अभियोजन की ओर से अधिवक्ता विकास नारायण सिंह ने पैरवी की। इसी तरह दुष्कर्म के एक मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो मधु डोगरा की अदालत ने एक आरोपी को दोषी पाते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। इस मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से कोतवाली भदोही में दो जून 2016 को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। साक्ष्य संकलन के बाद विवेचना अधिकारी ने आरोप पत्र आरोपी सरफराज निवासी हरभोग, थाना अघौरा, भभुआ-बिहार के खिलाफ न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन की ओर से शासकीय अधिवक्ता कौलेश्वरनाथ पांडेय ने पैरवी की।