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डोमोटेक्स: किफायती और विविध रंगों पर आश्रृत होगा भारतीय दल

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भदोही। जर्मनी के हनोवर शहर में 10 जनवरी से हो रहे चार दिवसीय डोमोटेक्स में भारतीय कालीन निर्यातक किफायती और विविध रंगों वाले कालीनों पर आधारित होंगे। स्टाल लगाने वाले निर्यातकों की जनवरी के प्रथम सप्ताह से रवानगी शुरू हो जाएगी। बहुत से निर्यातक तो वहां प्रदर्शित करने वाले सैंपल्स जर्मनी भेज चुके हैं। उनका मानना है कि उम्मीद सस्ते कालीनों पर टिकी हैं। क्योंकि आने वाली जेनरेशन की पसंद ही कुछ ऐसी है।
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वैश्विक मंदी अन्य उद्योगों के साथ साथ कालीन उद्योग पर भी साफ दिख रही है। बावजूद इसके एक उम्मीद लेकर कालीन उद्यमी जर्मनी के लिए रवाना होंगे। डोमोटेक्स साल भर उद्यमियों की मेहनत का नतीजा देता है। अगला साल कालीन उद्योग के लिहाज से कैसा जाएगा उद्यमी डोमोटेक्स पर ही आश्रृत रहते हैं। लिहाजा लोग तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगे हैं।
कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के प्रशासनिक सदस्य अब्दुल रब अंसारी वर्ष 2007 से डोमोटेक्स में लगातार भाग लेते रहे हैं। वे बताते हैं कि वर्ष 2015 के बाद से परिस्थितियां बदली हैं। हमारी उम्मीदें कहीं अधिक होती हैं लेकिन खर्च के अनुपात में उतनी सफलता हांथ नहीं लगती। बताया कि इस बार वे स्वयं नहीं जा रहे हैं लेकिन उनके घर के पांच सदस्य 5 जनवरी को जर्मनी के लिए रवाना होंगे। उन्होंने बताया कि लगभग डेढ़ सौ सैंपल्स में से अधिकतर जर्मनी पहुंच चुके हैं। कुछ और विशेष सैंपल्स साथ ले जाएंगे। बताया कि हम ईको फ्रेंडली डाई वाले कालीनों पर अधिक जोर दे रहे हैं। इसके अलावा विश्व की यंग जेनरेशन टेक्सचर और रंगामेजी पर अधिक ध्यान दे रही है।
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कितने आशान्वित हैं? के सवाल पर उनके बेटे फैसल रब ने कहा कि सस्ते से लेकर महंगे कालीनों का कलेक्शन लेकर जा रहे हैं। जिसमें खरीदारों को रिझाने के हर आईटम हैं, लेकिन नतीजा क्या होगा यह आने वाले समय बताएगा। बताया कि जर्मनी से इंग्लैंड और फिर यूएसए के बाजारों को टटोलते हुए भारत लौटेंगे।
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