मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके हौसलों से उड़ान होती है। इसे साबित कर दिखाया है जिले की इंटरनेशनल हॉकी खिलाड़ी निलांजली राय ने। मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली निलांजली राय की संघर्ष गाथा कुछ यूं है। दूसरों की हॉकी से मुंसीलाटपुर स्टेडियम से कैरियर की शुरूआत करने वाली निलांजली अपना परचम आस्ट्रेलिया में लहरा चुकी हैं। मुंसीलाटपुर स्टेडियम में कोच मुनव्वर हुसैन के मार्गदर्शन में हॉकी खेल को आगे बढ़ाया और इंटरनेशनल मैच खेलकर डंका बजाया। उसी दम पर स्पोर्ट्स कोटे से रेलवे में नौकरी भी प्राप्त की। अब दिल्ली रेलवे में सेवा दे रही हैं।
बताती हैं कि जब कैरियर की शुरूआत की तो हमारे पास खेलने के लिए हॉकी (स्टिक) नहीं थी। मैदान में सीनियर्स को खेलते देखती थीं। हॉकी के इंतजार में घंटे भर मैदान में बैठी रहती थीं। हॉकी मिलने के बाद खेल की शुरूआत करती थीं। भदोही जिले के मुंसी कलापुर गांव की रहने वाली निलांजली के पिता कृष्णा राय पेशे से किसान हैं, माता गायत्री देवी गृहिणी हैं। तीन बहनें और दो भाई हैं। दूसरे स्थान पर निलांजली हैं। भदोही के मुंसीलाटपुर स्टेडियम से 2009 से हॉकी खेलने की शुरूआत निलांजली ने की। इस बीच तमाम उतार चढ़ाव आने के बाद आखिरकार सफलता हासिल मिली। कई इंटरनेशनल और नेशनल हॉकी मैच खेल चुकी हैं। लोगों को हॉकी खेलते हुए देख खेलने का जुनून पैदा हुआ।