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मासूमों का हक दबाए बैठे हैं कुछ स्वयं सहायता समूह

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कुपोषण के खिलाफ जंग में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की तरफ से पोषाहार वितरण की मुहिम धरातल पर फेल होती नजर आ रही है। साल भर पूर्व व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन आवंटन के बाद भी पोषाहार धात्रियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी हाथ खींच ले रहे हैं। इसको लेकर नाराजगी बढ़ने लगी है। कई लाभार्थी धात्रियों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर वितरण में गड़बड़ी की शिकायत की है।
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बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से कुपोषित बच्चों और धात्रियों को दाल, रिफाइंड, पोषाहार, चावल आदि दिए जाते हैं। पूर्व में गोदामों से उठने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लाभार्थियों को पोषाहार वितरित करती थीं। हालांकि प्रदेश स्तर पर पोषाहार वितरण में अनियमितता का मामला सामने आने पर शासन ने स्वयं सहायता समूहों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। शुरूआत में व्यवस्था ठीक चली, लेकिन अब आवंटन होने के माह भर बाद भी लाभार्थियों तक पोषाहार नहीं पहुंच पा रहा है। इसको लेकर लोगों में नाराजगी भी बढ़ने लगी है। सुरियावां ब्लॉक के अर्जुनपुर गांव में पोषाहार वितरण की जिम्मेदारी संभाल रहे समूह पर मनमाना रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मुखर हो गई हैं। आरोप लगाया कि परियोजना कार्यालय से आवंटन होने के बाद उनके माध्यम से वितरण कराना चाहिए, लेकिन समूह खाद्य सामग्री का वितरण नहीं कर रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ऊषा पाल ने बताया कि उनके माध्यम से पोषाहार वितरण नहीं हो रहा है, इसके चलते उनके पास इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। उधर, दिसंबर में आया सामान अब तक वितरित नहीं हो सका है। अर्जुनपुर इकलौता गांव नहीं है। अधिकांश गांवों में कमोवेश यही स्थिति है। जिले में 1492 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इन केंद्रों पर एक लाख 74 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। उधर, अर्जुनपुर गांव की धात्री ऊषा देवी, रेनू देवी, चांदनी, चंपा देवी का कहना है कि दो महीने से खाद्य सामग्री, पोषाहार नहीं मिला है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पास जाने पर वह पल्ला झाड़ ले रही हैं। उनका कहना है कि इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की गई है। प्रभारी डीपीओ मंजू वर्मा का कहना है कि अब तक 15 समूहों की शिकायत विभाग के पास आई है। इसकी शिकायत विभाग के उच्चाधिकारियों से की गई है। जहां-जहां वितरण नहीं हो रहा है, उन गांवों से संबंधित समूहों को हटाने का प्रस्ताव दिया गया है।
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