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कोरोना काल में भर्ती हुए 89 स्वास्थ्य कर्मियों की सेवा समाप्त

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कोरोना महामारी में जान जोखिम में डालकर नौकरी करने वाले 89 स्वास्थ्य कर्मियों को त्योहारी सीजन में झटका लगा है। स्वास्थ्य विभाग ने उनकी सेवा समाप्त कर दी है। इससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब कर्मी सीएचसी और पीएचसी पर समायोजित करने की मांग कर रहे हैं।
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वैश्विक महामारी कोरोना की पहली लहर के दौरान एक्सपो मार्ट, सीएचसी भदोही और महाराजा बलवंत सिंह को कोविड अस्पताल बनाया गया। स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के कारण अगस्त में शासन के निर्देश पर स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, ईसीजी टेक्नीशियन, एक्सरे विशेषज्ञ, कंप्यूटर ऑपरेटर, वार्ड ब्वाय और स्वीपर सहित कुल 99 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई। संक्रमितों की जांच से लेकर दवाई आदि देने का काम इन्हीं के जिम्मे था। जनवरी 2021 में संक्रमण की स्थिति सामान्य होने के बाद मार्च तक नियुक्त स्वास्थ्यकर्मियों को सेवा समाप्त के लिए नोटिस भेजी गई। उसके बाद कोरोना की दूसरी लहर के कारण नोटिस को विभाग ने वापस ले लिया। अगस्त 2021 तक स्वास्थ्यकर्मी अलग-अलग स्थानों पर कार्यरत रहे। दूसरी लहर के थमने पर 30 सितंबर को स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस भेजकर इनमें से 89 स्वास्थ्यकर्मियों की सेवा समाप्त कर दी। इसको लेकर स्वास्थ्यकर्मी परेशान हैं। उनका कहना है कि विभाग उनका कहीं समायोजन कर दे। करीब एक साल से अधिक समय तक जान जोखिम में डालकर नौकरी की और अब अचानक उन्हें हटा दिया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष चक ने कहा कि कोरोना संक्रमण काल के लिए ही स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति की गई थी। उनके नियुक्ति पत्र में कहा गया है कि जब संक्रमण समाप्त होगा तब नौकरी भी खत्म हो जाएगी। यदि शासन स्तर से कोई दिशा-निर्देश मिलेगा तो उसे अमल में लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अगर तीसरी लहर आएगी तो प्राथमिकता के तौर पर वही कर्मी रखे जाएंगे। 10 लैब टेक्नीशियन से अभी भी काम लिया जा रहा है।
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