कंसापुर में बने कांशीराम आवास।
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मान्यवर कांशीराम शहरी आवास के आवंटियों ने सरकार से ही झोल कर दिया है। जी हां गरीबी के नाम पर आवास पाने वाले आवंटी उसे किराए पर देकर कमाई कर रहे हैं। शिकायत के बाद शुरूआती जांच में 16 लाभार्थियों का आवंटन निरस्त हो चुका है। जिसकी संख्या आगे और भी बढ़ सकती है।
बसपा सरकार में शहरी गरीबों को आवास मुहैया कराने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने अपने राजनीतिक गुरु कांशीराम की स्मृति में मान्यवर कांशीराम शहरी निर्बल आवास योजना लागू की थी। उस दौरान ज्ञानपुर नगर के कंसापुर क्षेत्र में करीब 29 करोड़ की लागत से 1500 आवास बनाए गए। जनपद के घोसिया, खमरिया, भदोही, सुरियावां नगर पंचायत से शहरी गरीबों का चयन कर आवास आवंटन किया गया। कुछ महीनों तक आवासों में रहने वाले आवंटी एक से दो साल गुजरते ही आवास को छोड़कर अपने पुराने घर चले गए। उन आवासों को किराए पर दे दिया।
जिन आवासों को किराए पर दिया है उसमें गैर प्रांत से आकर लोग ठहरे हैं। जिसको लेकर वहां रहने वाले भी कई बार उच्चाधिकारियों को शिकायत कर चुके हैं। इनकी गतिविधियों के बारे में कालोनी के लोगों को संदेह है। उनका कहना है कि यह कभी भी किसी घटना को अंजाम दे सकते हैं। एक आवंटी ने बताया कि 200 से अधिक आवास किराए पर दिए गए हैं। ऐसे लोगों को हटाना जरूरी है। पिछले दिनों आवंटियों की शिकायत पर डूडा अधिकारी के नेतृत्व में 200 से अधिक आवासों की जांच की गई। जिसमें 16 आवास किराए पर मिले। एडीएम शैलेंद्र मिश्र ने उसका आवंटन निरस्त कर दिया। पीओ डूडा का प्रभार देख रहे मुख्य विकास अधिकारी भानु प्रताप सिंह ने कहा कि एक-एक आवास का सत्यापन हो रहा है। जो कमरे किराए पर मिलेंगे उसका आवंटन निरस्त होगा।