भदोही। बिजली के निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का एसी कार्यालय पर बुधवार से प्रतिदिन तीन घंटे का विरोध प्रदर्शन चल रहा है।
बृहस्पतिवार को दूसरे दिन विद्युत कर्मचारियों ने कहा कि हमारी लड़ाई पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से है। हम आम जनता के लिए परेशानी नहीं खड़ी करना चाहते, इसीलिए तीन घंटे के शांतिपूर्ण प्रदर्शन का ऐलान किया गया है। निजीकरण से न तो बिजली उपभोक्ताओं का भला होगा ना ही विद्युत कर्मचारियों का। प्रबंधन को हठवादी रवैया छोड़ देना चाहिए।
संघर्ष समिति के जिला संयोजक धीरेंद्र प्रताप कौशल ने कहा कि हमारे हड़ताल को लेकर अभी से कारपोरेशन के चेयरमैन शासन को और प्रदेश के मुख्य सचिव को गुमराह कर रहे हैं। गलत सूचनाएं ऊपर पहुंचाई जा रही है। चेयरमैन की सूचना के आधार पर जनपदों के जिलाधिकारियों को हड़ताल से निपटने को तैयार रहने के आदेश जारी किए जा रहे हैं।
इससे अनावश्यक रूप से ऊर्जा निगमों में अशांति का वातावरण बन रहा है। बृहस्पतिवार को तीन घंटे के प्रदर्शन के दौरान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि झूठा शपथ पत्र देने वाली फर्म जिस पर अमेरिका में दंड लगाया गया है।
कॉरपोरेशन संविदा कर्मियों की छंटनी कर रहा है। जिससे टकराव के आसार बन रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि टेंडर मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष के रूप में निदेशक वित्त निधि नारंग का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, लेकिन निजीकरण में हो रहे घोटाले को देखते हुए नए निदेशक (वित्त) पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कार्यभार ग्रहण करने से इंकार कर दिया है।
जिससे अब निधि नारंग को दूसरा सेवा विस्तार देने की तैयारी की जा रही है। यदि ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति रद्द कर दी जाए और निजीकरण का निर्णय वापस ले लिया जाए तो हम लोग आंदोलन की घोषणा वापस ले लेंगे। हम 42 जनपदों की जमीन निजी घरानों को एक रुपए लीज पर दिए जाने के निर्णय के खिलाफ हैं। प्रदर्शन में धीरज मिश्रा, आरती यादव, विजय यादव, सत्य प्रकाश मौर्य, अभिषेक प्रजापति, माधव द्विवेदी, सागर श्रीवास्तव, अशोक मौर्य, संतोष श्रीवास्तव, आजाद उपाध्याय रहे।