शाम मधुबन थाना क्षेत्र के कटघराशंकर मोड़ स्थित बिना पंजीकरण के संचालित विमला सदन अस्पताल में शनिवार की देर शाम ऑपरेशन के बाद गर्भवती महिला ने बेटे को जन्म दिया। इसके बाद तबीयत बिगड़ने पर जिला अस्पताल ले जाते समय उसकी माैत हो गई। पति का आरोप है कि अस्पताल में बिना समुचित जांच और आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया अपनाए ही डाॅक्टरों ने अफसाना की निर्धारित अवधि पूरी होने से करीब डेढ़ महीने पहले ऑपरेशन कर दिया। ऑपरेशन से पहले अल्ट्रासाउंड जांच भी नहीं कराई गई। रविवार को इस मामले की सूचना मिलने पर एसीएमओ डॉ. आरएन सिंह अस्पताल पहुंचे। जांच में कोई दस्तावेज न मिलने पर अस्पताल को सील कर दिया। फतेहपुर मंडाव सीएचसी और मधुबन पीएचसी के बीच बिना लाइसेंस के संचालित अस्पताल की विभागीय मॉनीटरिंग पर सवाल प्रश्न चिह्न लगा रहा है।
तिघरा निवासी पति इंतजार अहमद ने बताया कि उसका निकाह तीन वर्ष पहले अफसाना से हुई थी। बताया कि उसकी एक बेटी है। पत्नी के गर्भवती होने पर वह विमला सदन में उपचार करा रहा था। शनिवार को पेट में दर्द होने पर वह मधुबन स्थित विमला सेवा सदन अस्पताल लेकर पत्नी को गया था। बताया कि ऑपरेशन के कुछ ही समय बाद अफसाना की तबीयत बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर अस्पताल प्रबंधन ने उसे मऊ स्थित एक निजी अस्पताल रेफर कर दिया। वहां चिकित्सकों ने मरीज की गंभीर स्थिति देखते हुए जवाब दे दिया। इसके बाद उसे दूसरे निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से भी भर्ती करने से मना कर दिया गया। अंततः जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में अफसाना की माैत हो गई। नवजात शिशु सुरक्षित है। घटना के बाद गांव में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते सही इलाज और मानकों के अनुरूप चिकित्सकीय प्रक्रिया अपनाई जाती तो अफसाना की जान बचाई जा सकती थी। इससे पहले 24 जून को बड़राव सीएचसी से महज 500 मीटर की दूरी पर बिना पंजीयन के संचालित अस्पताल में गर्भवती अर्चना चौहान की जान चली गई थी। अखबार की स्टिंग के बाद बिना पंजीयन के संचालित दस अस्पताल बीते एक माह में सील हुए थे। एसीएमओ डॉ. आरएन सिंह ने कहा कि जांच के दाैरान अस्पताल पंजीकृत नहीं मिला। अस्पताल को सील कर दिया गया है। अस्पताल में भर्ती दो महिला मरीजों को जिला अस्पताल भेज दिया गया है।
हर सीएचसी प्रभारी की जिम्मेदारी, करें क्षेत्र में मॉनीटरिंग.... फिर भी संचालित अस्पताल खोल रहे हैं पोल
मऊ। जिले के दस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी को अपने क्षेत्र में संचालित अस्पतालों की मॉनीटरिंग करने का निर्देश सीएमओ की ओर से दिया गया है। इसके बाद भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। बीते 24 जून को भी नदवासराय पीएचसी से 500 मीटर दूर हमीदपुर रोड पर रिहायशी मकान में संचालित फातमा क्लीनिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में गंगुआबारी निवासी राजन चौहान ने अपनी गर्भवती पत्नी अर्चना चौहान को भर्ती कराया। संबंधित अस्पताल में मौजूद चिकित्सक ने जांच के बाद सुरक्षित प्रसव कराने का दावा करते हुए अर्चना चौहान को बीते 24 जून की रात्रि 2 बजे भर्ती करा लिया। आरोप है कि जहां मौजूद चिकित्सक द्वारा प्रसव के बाद बच्चे की मौत हो गई। उसके कुछ देर बाद प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी। चिकित्सक प्रसूता की स्थिति गंभीर देख परिजनों को अन्य अस्पताल ले जाने का दबाव बनाने लगा। परिजन जब तक मामले को समझ पाते प्रसूता की मौत हो गई।
दस महीने में 36 से अधिक अस्पताल सील
मऊ। बीते अगस्त 2025 माह में एक महीने में तीन गर्भवती महिलाओं की मौत के बाद अखबार की ओर से इस मुद्दे पर सीरीज चलाकर सितंबर खबरें प्रकाशित कीं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर टीम ने छापेमारी अभियान चलाकर बिना पंजीयन के संचालित 26 से अधिक अस्पतालों को सील किया था। इसी तरह से बीते 23 जून को बिना पंजीयन के संचालित निजी अस्पतालों में गर्भपात के अवैध धंधे की स्टिंग के बाद दस अस्पताल बीते एक माह में विभाग ने सील किया। नौ माह में 36 से अधिक अस्पताल सील होने के बाद भी हर माह एक से दो मामले ऐसे आ रहे हैं।