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मौसम की मार से आलू की किसान हो सकते हैं परेशान, झुलस रोग की आशंका

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एक सप्ताह पहले मौसम अच्छा था, लेकिन अचानक बदले मौसम की वजह से बादलों की वजह से किसानों की चिंता बढ़ गई। 27 दिसंबर को बादल और 28 को झमाझम बारिश के बाद मौसम अभी तक सुधरा नहीं है। इस वजह से कभी धूप तो कभी छांव के साथ ही कोहरा युक्त मौसम बना हुआ है। इस स्थिति में आमजन जहां जहां ठंड को लेकर परेशान हैं तो वहीं आलू की खेती करने वाले किसान भी चिंतित हैं। आलू की फसलों में झुलसा रोग लगने की आशंका बढ़ गई है। जिला उद्यान अधिकारी सुनील तिवारी बताते हैं कि जब मौसम में उतार-चढ़ाव होता है या बदली युक्त मौसम होता है तो आलू की फसलों में नुकसान की संभावना बढ़ जाती है। इस मौसम में किसान कुछ उपाय करके फसलों को बचा सकते हैं ।
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जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि बादल युक्त 80 फीसदी से अधिक आद्र वातावरण एवं 10 से 20 डिग्री तापमान पर इस रोग का प्रकोप बहुत तेजी से होता है। और 2 से 4 दिनों के अंदर ही संपूर्ण फसल नष्ट हो जाती है । प्रकोप से पतियां सिरे से झुलसना प्रारंभ होती हैं जो तीव्र गति से फैलती हैं। पतियों पर भूरे काले रंग के जलीय धब्बे बनते हैं। पतियों के निचली सतह पर रुई की तरह फफूद दिखाई देती है।
आलू की अगेती व पिछेती फसल को बचाने के लिए मैगनीज कार्बामेट 2.0 से 2.5 किग्रा अथवा मैंकोजेब 2 से 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 800 से 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव किया जाए तथा माहू कीट के प्रकोप की स्थिति में नियंत्रण के लिए दूसरे छिड़काव में फफूंदी नाशक के साथ कीटनाशक दवा का छिड़काव कर सकते हैं।
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