क्रिकेटर यशस्वी जायसवाल, शिवम दूबे, डब्ल्यूडब्ल्यूई में परचम लहराने वाले रिंकू सिंह राजपूत को भला कौन नहीं जानता। इन जैसे और भी कई नाम हैं जो कालीन नगरी का नाम वैश्विक पटल पर चमका रहे हैं। इनसे प्रेरणा लेकर जिले के कई युवक बुलंदी को छूने की तमन्ना भी रखते हैं, लेकिन खेल की सुविधाओं की कमी के कारण उनकी तमन्नाओं को पंख नहीं लगा पा रहे।
सरकार ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और खेल को बढ़ाने के लिए खेलो इंडिया शुरू किया है। उसके तहत हर ग्राम पंचायत में खेल का मैदान बनना है, लेकिन जिले में अब तक किसी भी ग्राम पंचायत में जमीन नहीं मिल सकी। युवा कल्याण विभाग ने सभी ग्राम पंचायतों की सूची तो निकलवा ली है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली। हद यह कि जो खेल के मैदान पहले से हैं उनकी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। ऐसे में खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में काफी दिक्कत है। डीघ ब्लाक के बारीपुर में कई साल पहले खेल मैदान बनाया गया था, लेकिन इसकी स्थिति इन दिनों काफी खराब है। यहां न तो एथलेटिक्स के खिलाड़ियों के लिए ट्रैक है और न ही अन्य खिलाड़ियों के लिए कोई खास इंतजाम। विवशता में इलाके के खिलाड़ी किसी पेड़ के नीचे या किसी खाली जमीन में अभ्यास करते हैं। प्रभारी जिला युवा कल्याण अधिकारी ने बताया कि जिले के सभी ग्राम पंचायतों में खेल का मैदान बनाया जाना है। इसमें खेलकूद के साथ ही जिम की भी व्यवस्था होनी है, लेकिन जमीन नहीं मिलने से काम लटका है। जमीन के लिए पुन: तहसीलों को पत्र लिखा गया है।