भदोही नगर में करोड़ों रुपये की जमीन करीब तीन महीने बाद भी सिंचाई विभाग के नाम दर्ज नहीं हो सकी। तत्कालीन डीएम राजेंद्र प्रसाद का आदेश फाइलों में सिमटकर रह गया है। इससे राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली सवालों में घिर गई है।
भदोही नगर में सिचाई विभाग का मुख्य कार्यालय के अलावा बेशकीमती जमीन है। पूरी संपत्ति की कीमत 300 करोड़ से अधिक की बताई जा रही है। अभिलेखों में हेराफेरी कर सिंचाई विभाग की कीमती भूमि पर एक कालीन निर्यातक ने अपना नाम दर्ज करा लिया था। इसी आधार पर वह सिंचाई विभाग से मुआवजा का दावा भी कर दिया था। उसने मुआवजे के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने जांच कराई तो मामला फर्जी मिला। रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने कालीन निर्यातक की याचिका को खारिज कर दिया। इसी मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी भदोही को हटा दिया था। अपर जिलाधिकारी ने भूमि को सिंचाई विभाग के नाम दर्ज किए जाने का निर्देश उप जिलाधिकारी भदोही को दिया, लेकिन अभी तक सिंचाई विभाग का नाम दर्ज नहीं किया जा सका है। अपनी भूमि पर नाम दर्ज कराने के लिए सिंचाई विभाग के अभियंता तहसील में चक्कर काट रहे हैं। अधिशासी अभियंता नहर पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि तहसील प्रशासन की उदासीनता से विभाग के नाम जमीन दर्ज नहीं हो सकी। जल्द ही उच्चाधिकारियों से मिलकर मामले की शिकायत की जाएगी।