फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उजड़ गया पूरा परिवार: 10 साल पहले पिता को खोया, अब सांड के हमले में मां और इकलौते बेटे की भी मौत

Sat, 08 Aug 2026 09:24 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, भदोही।

सार

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में दर्दनाक घटना सामने आई। यहां सांड के हमले में मां और इकलौते बेटे की जान चली गई। दोनों किराने की दुकान से सामान लेने जा रहे थे। इसी दौरान सांड ने हमला कर दिया। 
विज्ञापन
प्रांशु सिंह की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Bhadohi News: जिले के गोपीगंज थाना क्षेत्र के अमवा गांव में शुक्रवार को देर शाम छुट्टा पशुओं के हमले ने एक परिवार की खुशियां उजाड़ दीं। घर से किराने की दुकान पर बाइक से सामान लेने निकले मां-बेटे पर संरक्षित सांड ने हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोपीगंज ले जाया गया, जहां हालत नाजुक होने पर चिकित्सकों ने वाराणसी ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। सरकारी एंबुलेंस से वाराणसी ले जाने के बाद इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई।

विज्ञापन


दुकान पर सामान लेने जा रहे थे मां-बेटे
मृतकों की पहचान प्रांशु सिंह पुत्र स्व. जनार्दन सिंह उर्फ मुन्ना सिंह और उनकी मां विनीता सिंह पत्नी स्व. जनार्दन सिंह, निवासी पर्वतपुर के रूप में हुई। बताया जाता है कि मां-बेटा घर से किराने की दुकान पर सामान लेने जा रहे थे। दुकान के सामने पहुंचते ही छुट्टा पशुओं के बीच से एक सांड ने अचानक उन पर हमला कर दिया। 

हमले में दोनों गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। परिजन और ग्रामीण आनन-फानन दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोपीगंज लेकर पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने गंभीर हालत देखते हुए दोनों को वाराणसी ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। सरकारी एंबुलेंस से वाराणसी पहुंचने के बाद उपचार के दौरान दोनों की मौत हो गई।

विज्ञापन

10 साल पहले पिता की हुई थी मौत
इस दर्दनाक हादसे ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया। ग्रामीणों के अनुसार, प्रियांशु के पिता जनार्दन सिंह उर्फ मुन्ना सिंह की करीब 10 वर्ष पहले ही मौत हो चुकी थी। पिता की मौत के बाद मां बिनीता सिंह ही परिवार का सहारा थीं और प्रियांशु उनका इकलौता पुत्र था। अब छुट्टा सांड के हमले में मां और इकलौते बेटे की मौत से परिवार में कोई सहारा नहीं बचा।
विज्ञापन

पशुओं का आतंक
हादसे की खबर गांव में पहुंचते ही शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में संरक्षित पशुओं और सांडों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। इससे पहले भी कई लोग इनके हमले का शिकार हो चुके हैं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर कब तक छुट्टा पशुओं के हमले में लोगों की जान जाती रहेगी? उन्होंने प्रशासन से इन पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें