चीनी मांझे की बिक्री पर पूर्ण रूप से रोक है, लेकिन इसका अनुपालन नहीं हो पा रहा है। कहीं चोरी-छिपे तो कहीं खुलेआम जीवन के लिए घातक मांझे की बिक्री जारी है। मंझे में फंसकर लोगों के घायल होने की घटनाएं भी सामने आई हैं, लेकिन इसके प्रति उदासीन बना हुआ है। मकर संक्राति से एक-दो दिन पूर्व खानापूर्ति के नाम पर छापे की कार्रवाई की जाती है, लेकिन इसके पूर्व व बाद में सब कुछ पहले जैसे ही चलता रहता है।
कालीन नगरी में चीनी मंझे से किसी भी प्रकार की बड़ी अप्रिय घटना अभी नहीं घटित हुई है। इतना जरूर है कि मंझे में फंसकर पांच से छह लोगों के घायल होने की घटनाएं जरूर सामने आई हैं। उसकी प्रमुख वजह पतंग उड़ाते समय जब कहीं मांझा नीचे आ जाता है तो साइकिल और बाइक सवार फंस जाते हैं। यह इतना मजबूत होता है कि टूटने की बजाय शरीर के जिस हिस्से पर लगता है, वहां कट जाता है। पतंगबाजी का दौर ठंड के मौसम के साथ शुरू हो जाता है और मकर संक्रांति के बाद खत्म हो जाता है। महज एक माह के मनोरंजन के दौरान होने वाले हादसे लोगों को जीवन भर का दंश दे जाते हैं। जिले में करीब 20 लाख रुपये तक के मांझे का कारोबार होता है। मकर संक्रांति नजदीक आते ही चीनी मांझे से पूरा बाजार पट गया है। देशी मांझा से सस्ता होने के चलते चीनी मांझा की बिक्री ज्यादा होती है। प्रतिबंधित होने के बावजूद चीनी मांझा बाजारों में धड़ल्ले से बिक रहा है। एसडीएम ज्ञानपुर प्रियंका प्रियंका प्रियदर्शिनी का कहना है कि चीनी मांझा पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। इसकी खरीद और बिक्री करने वाले दोषी होंगे। इसको लेकर जल्द ही सघन जांच अभियान चलाया जाएगा। अगर कोई चीनी मांझा बिक्री करते मिलता है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जायेगी।