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इसी जीवन में मुक्ति संभव : पंडित प्रमोद

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रैमलपुर में भागवत कथा कहते पंडित प्रमोद शास्त्री। संवाद
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नईबाजार। मानव जीवन सर्वश्रेष्ठ जीवन है, क्योंकि इसी जीवन से मुक्ति सम्भव है। मनुष्य को क्रमिक मुक्ति और कृपा मुक्ति जैसे दो माध्यमों से मुक्ति मिलती है। भदोही ब्लॉक के रैमलपुर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन कथावाचक पं. प्रमोद शास्त्री ने ये बातें कहीं।
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उन्होंने कहा कि मानव जीवन का चरमोत्कर्ष है, मुक्ति और भागवत के चार अक्षरों में प्रत्येक अक्षर मुक्ति प्रदायक हैं। भा अर्थात भक्ति, यह तो सहज ही मुक्ति को अपनी अनुगामिनी बना लेती है। वहीं ग अर्थात ज्ञान इसका स्वरूप ही मुक्ति है। तीसरा अक्षर व अर्थात वैराग्य यह मुक्ति बोधक है। भागवत का चौथा अक्षर तो अर्थात त्याग यह भी मोक्ष का ही स्वरूप है। वस्तुत: त्याग ही तो जीवन का चरमोत्कर्ष है। जिसने सुखपूर्वक त्याग करना सीख लिया, उसने जीना सीख लिया और जिसने जीना सीख लिया, वह नित्य शुद्ध-बुद्ध मुक्त हुआ। उन्होंने धुंधकारी की प्रेतत्व विमुक्ति की कथा सुनाई। मुख्य यजमान संतोष ने व्यास पीठ की आरती उतारी। इस दौरान नरेंद्र, प्रमोद, विनोद, विरेन्द्र पाठक आदि मौजूद रहे।
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