सीएमओ कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के आरोप की जांच डीएम के आदेश पर सीडीओ ने शुरू का दिया है। जांच पूरी करने के लिए सीडीओ भानु प्रताप सिंह ने अहम दस्तावेजों के साथ प्रमुख फाइलों को तलब किया है। जांच शुरू होने से सीएमओ दफ्तर में खलबली मची है।
किसी न किसी कारणों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाला सीएमओ कार्यालय एक बार फिर से शिकायत होने से विवादों में घिर गया है। कोरोना काल में आक्सीजन घोटाला, कर्मचारियों के बीच मारपीट से लेकर अन्य मामलों में विभाग पहले ही सवालों में घिर चुका है। 15 दिन पूर्व किसी ने डीएम से शिकायत की, इसमें बताया गया कि स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जिले में तैनात नौ एडिशनल सीएमओ में से सिर्फ चार ही प्रतिदिन ड्यूटी पर आते हैं। जबकि अन्य पांच एसीएमओ महीने में दो से तीन बार आकर सिर्फ हाजिरी लगाने के साथ वेतन का आहरण करते हैं। सबसे मजे की बात यह है कि कोरोना जैसी महामारी में भी आरोपों में घिरे एसीएमओ ड्यूटी करने नहीं आए, जबकि एक एसीएमओ की ड्यूटी के दौरान ही कोरोना से मौत हो गई थी। विभागीय तालमेल से सालों से चल रहे खेल को रोकने के लिए डीएम आर्यका अखौरी सख्त हो गई हैं। उन्होंने प्रकरण की जांच के लिए मुख्य विकास अधिकारी भानु प्रताप सिंह को नामित किया है। जांच अधिकारी ने प्रकरण में सीएमओ से फाइल तलब की है। सीडीओ ने बताया कि मामले की जांच मिली है। जिसको लेकर सीएमओ से फाइल मांगी गई है। सरकार की मंशा के खिलाफ काम करने वालों पर सख्ती की जाएगी।