ज्ञानपुर। सड़क दुर्घटना में मौत होने के बाद इंश्योरेंस कंपनी द्वारा बीमा देने में आनाकानी करने पर जिला उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को दो माह के अंदर 15 लाख रुपये बीमा राशि देने का आदेश दिया। आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार डे ने इंश्योरेंस कंपनी को आवेदन तिथि से भुगतान की तिथि तक बीमा राशि पर छह फीसदी वार्षिक ब्याज की दर से भुगतान का आदेश दिया है। ऐसा नहीं करने पर छह की बजाय 12 फीसदी की दर से भुगतान करना होगा।
पीड़िता के ऑटो चालक पति की महाराष्ट्र में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। जिला उपभोक्ता आयोग के रीडर स्वतंत्र रावत ने बताया कि गोपीगंज कोतवाली के सिंहपुर निवासिनी प्रमिला ने नौ सितंबर 2022 को आयोग में शिकायत दर्ज कराई। बताया कि उनके पति श्यामधर रामराज यादव महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा चलाते थे। वहीं 2 अप्रैल 2022 से एक अप्रैल 2023 तक बीमा सक्रिय रहा।
उन्होंने इस बीमा के तहत पर्सनल एक्सीडेंट बेनिफिट के लिए 315 रुपया प्रीमियम की धनराशि अदा की थी। जिस पर जोखिम होने पर 15 लाख रुपये बीमा राशि मिलनी थी। बताया कि नौ जून 2022 को उनके पति की ऑटो रिक्शा में टक्कर लगने से उनकी मौत हो गई। जिसके बाद उन्होंने प्रबंधक रॉयल सुंदरम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के वाराणसी कार्यालय और चेन्नई के कार्यालय को 15 लाख के पर्सनल एक्सीडेंट बेनिफिट के लिए आवेदन किया, लेकिन बीमा कंपनी द्वारा उनके आवेदन का निस्तारण नहीं किया गया।
आयोग के नोटिस के बाद कंपनी ने कहा कि वादिनी का मुकादमा गलत तथ्यों पर आधारित है। कोर्ट ने पाया कि पीड़ित का बीमा दुर्घटना तिथि तक सक्रिय रहा। इसके अलावा पीड़िता के पति के मौत का मुकदमा और शव का पोस्टमार्टम इत्यादि भी हुआ था। आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार डे, महिला सदस्य दीप्ति श्रीवास्तव और सदस्य विजय बहादुर सिंह की पीठ ने इश्योरेंस कंपनी को दो माह के भीतर बीमा की धनराशि 15 लाख रुपये देने का निर्देश दिया।