बुंदेलखंड बागवानी योजना के तहत जिले में बागवानी का सपना अधूरा रह गया। विभागीय उदासीनता के कारण इस योजना में किसान दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। इसके चलते उद्यान विभाग का 25 हेक्टेयर जमीन पर बागवानी करने का लक्ष्य पूर्ण नहीं हो पा रहा है। अब नौ दिन में लक्ष्य पूरा कर पाना मुश्किल दिख रहा है।
पर्यावरण को हरा भरा एवं किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए उद्यान विभाग ने बुंदेलखंड बागवानी योजना की शुरूआत की है। इसमें आम, अमरूद, आंवला, नीबू, बैर सहित अन्य फलों की 25 हेक्टेयर में खेती का लक्ष्य रखा गया है। तमाम कोशिशों के बाद भी उद्यान विभाग लक्ष्य पूरा नहीं करा सका है। जिले में अब तक 18 हेक्टेयर जमीन पर बागवानी के लिए किसान मिल सके हैं। योजना का लाभ प्रथम आवक प्रथम पावक की तर्ज पर किसानों को दिया गया है। यह सत्र 31 मार्च 2022 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में मात्र नौ दिनों में लक्ष्य पूरा हो पाना मुश्किल हो गया है। ज्ञात हो, अनुदान की धनराशि किसानों के खातों में प्रति माह तीन हजार के रूप में तीन साल तक भेजी जाएगी। हर तीन महीने पर पौधो की जांच होगी। पौधे सही होंगे, तभी अनुदान की रकम संबंधित किसान के खाते में भेजी जाएगी। जिला उद्यान अधिकारी सुनील तिवारी का कहना है कि बुंदेलखंड योजना के तहत बागवानी के लिए 25 हेक्टेयर का लक्ष्य मिला था। इसमें से 18 हेक्टेयर जमीन पर बागवानी के लिए किसान चयनित कर लिए गए हैं। शेष सात हेक्टेयर के लिए आवेदन मांगे जा रहे हैं।