कोनिया की मिट्टी की खुशबू ने पूरे जनपद को सुगंधित किया है। कला तुलसी गांव निवासी गौरव पांडेय ने यूपीएससी की परीक्षा में सफलता अर्जित की है। उनकी आल इंडिया में 168वीं रैंक है। उनके चयन से परिवार में जश्न का माहौल है। परिवार के लोगों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया।
कला तुलसी गांव निवासी गौरव पांडेय के पिता अरुण कुमार पांडेय सेना में सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। गौरव और इनका परिवार दिल्ली में है। अमर उजाला से बातचीत के दौरान गौरव पांडेय ने बताया कि उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए और एमए अंग्रेजी साहित्य से की है। दो माह पूर्व उनका चयन इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) में इंटेलिजेंस अधिकारी के पद पर हुआ था, लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने गणित के लेक्चरर रहे दादा स्व.त्रिवेणी प्रसाद पांडेय सहित माता-पिता, बड़े पिता और पूरे परिवार को दिया। कहा कि उनके दादा का सपना था कि मैं सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर आईएएस अथवा आईपीएस बनकर देश की सेवा करूं। बड़े पिता राकेश कुमार पांडेय दिल्ली में प्रदेश भाजपा नेता और बिजनेसमैन हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि गौरव ने समूचे कोनिया सहित जिले का गौरव बढ़ाया है। कहा कि पूरा परिवार 25 वर्षों से शांति कुंज हरिद्वार से जुड़ा हुआ है। गौरव की सफलता पर हनुमान प्रसाद शुक्ल, राहुल दूबे, जयकृष्ण पांडेय, रामकृष्ण पांडेय, जितेंद्र पांडेय, अनुपम पांडेय आदि ने खुशी जताई। यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले गौरव पांडेय ने कहा कि आईएएस और आईपीएस की तैयारी में ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र के लड़के बहुत अच्छा करते हैं। कहा कि परिस्थितियों से लड़कर ऊपर आना पड़ेगा। यूपीएससी की परीक्षा में सफलता के लिए जी तोड़ मेहनत करनी पड़ती है। उनका कहना है कि यूपीएससी का पेपर ऐसा बनाया जाता है कि ग्रामीण क्षेत्र से आए बच्चे हों तो उनको किसी तरह का नुकसान न हो अथवा कोचिंग करने वाले बच्चों को अतिरिक्त फायदा न मिले। इस परीक्षा के लिए मेहनत से पढ़ाई करनी पड़ेगी। कहा कि आपको कुछ जरूरत है अथवा कोई कमजोरी है तो आपको अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ेगी। उनका कहना है कि परीक्षा के समय 8 से 10 घंटे पढ़ाई करते थे। पिता सेना में सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हैं। बड़े भाई सौरभ पांडेय सेंट्रल बैंक ज्ञानपुर शाखा में असिस्टेंट मैनेजर हैं। चचेरे भाई अनुराग पांडेय दिल्ली सचिवालय में क्लास दो के अधिकारी हैं।