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बंधनों से मुक्त होकर महिलाएं बने अपने निर्णय की निर्माता

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ज्ञानपुर। देश को आजाद हुए 75 वर्ष बीत गए, लेकिन आज भी महिलाएं तमाम सामाजिक बंधनों में जकड़ी हुई हैं। शहरों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं शिक्षा के क्षेत्र में काफी पीछे हैं। ऐसे में वह अपने लिए निर्णय नहीं ले पाती हैं। महिलाओं की स्वतंत्रता पर जब तब चर्चा-परिचर्चा भी होती रहती है लेकिन हालात में बदलाव नहीं आता। देश के संविधान ने महिलाओं को पुरुषों के ही समान अधिकार प्रदान किए हैं। बावजूद इसके तरक्की में वह पीछे रह जाती हैं। सेमिनार में शामिल महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि सभी बंधनों से मुक्त होकर महिलाओं को अपने निर्णय की निर्माता बनना होगा। तभी वह विकास में आगे बढ़ेंगी। कहा गया कि देश में वह महिलाएं शिखर पर पहुंचीं, जिन्होंने आगे बढ़ने के लिए खुद फैसले लिए।
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शनिवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित अपराजिता 100 मिलियन स्माईल्स के तहत महिला की स्वतंत्रता एवं उनका विकास विषयक सेमिनार में कुल नौ महिलाओं ने शिरकत की और अपने विचारों को बेबाकी से रखा। महिलाओं ने कहा कि आज बेटी के साथ-साथ मां की शिक्षा बहुत जरूरी है। क्योंकि यदि मां शिक्षित रहेगी तभी बेटी भी शिक्षित होगी। इसके अलावा महिलाओं ने कहा कि आज ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को सबसे ज्यादा शिक्षित करने की जरूरत है।
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