स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने का सरकार भले ही दावा करती है, लेकिन धरातल पर व्यवस्था इसके उलट है। जिले के दो प्रमुख राजकीय जिला अस्पतालों में रात के समय बीमार महिलाओं का उपचार कराना मुश्किल हो जाता है। इससे उनको निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। गंभीर केस आने पर प्रसव पीड़िता को अन्यत्र रेफर कर दिया जाता है।
जिले में महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय ज्ञानपुर और भदोही में महाराजा बलवंत सिंह जिला अस्पताल है। गर्भवती महिलाओं और प्रसव पीड़िता को बेहतर उपचार मिले इसके लिए दोनों चिकित्सालय में दो-दो महिला चिकित्सकों की तैनाती है। दिन में तो चिकित्सक रहती हैं, लेकिन रात में नहीं रुकतीं। इससे आए दिन रात में महिला मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। चिकित्सालय प्रशासन का मानना है कि व्यवस्था न होने के कारण महिला चिकित्सक निवास नहीं करती है। जबकि चिकित्सालय परिसर में आवास बना है। जिन महिला चिकित्सकों को आवास नहीं मिला है, उन्हें एचआरए यानी हाउस अलाउंस दिया जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रसव पीड़िता को समुचित उपचार मिल सके। एमसीएच, एमबीएस चिकित्सालय में हर दिन 30-35 प्रसव पीड़िता की ओपीडी होती है। इनकी जांच कर दवाई उपलब्ध कराई जाती है। चिकित्साल के प्रसव वार्ड में सीजर के बाद पीड़िता काे भर्ती किया जाता है। इनकी देखभाल करने के लिए रात में केवल नर्स ही रहती हैं। ऐसे में यदि किसी प्रसूता की तबीयत रात में गंभीर हो जाती है, तो उन्हें परिजन निजी अस्पताल ले जाने को विवश हो जाते हैं।
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केस- 1- ज्ञानपुर से सटे दुल्हीपुर से जिला चिकित्सालय में बुधवार की रात एक प्रसव पीड़िता आईं। वहां मौजूद महिला स्वास्थ्यकर्मी से डॉक्टर के बारे में जानकारी ली। किसी डॉक्टर के न होने पर वह अन्यत्र चली गईं।
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केस- 2- डीघ सीएचसी से 27 सितंबर को जिला चिकित्सालय एक रेफर केस आया। इसमें प्रसव पीड़िता की स्थित गंभीर थी, ऑपरेशन की जरूरत थी, लेकिन जिला चिकित्सालय में महिला डाॅक्टर की अनुपस्थिति में पीड़िता को मंडल अस्पताल रेफर कर दिया गया।
वर्जन:
दो महिला डॉक्टर हैं, एक ओपीडी में बैठती हैं और एक हमेशा ऑनकाल रहती हैं। प्रसव केस आने पर उन्हें कभी भी बुलाया जा सकता है। लेबर रूम में व्यवस्थाएं सही हैं। प्रसव पीड़िता को समुचित उपचार कर उन्हें दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। डॉ. संजय तिवारी, सीएमएस एमबीएस भदोही
रात में ऑपरेशन करने के लिए संसाधन नहीं है। बेहोशी के डॉक्टर नहीं है, एनआईसीयू है। दो महिला डॉक्टर हैं जो ओपीडी और लेबर रूम में बैठती हैं। गंभीर केस आने पर महिला डाॅक्टर को बुलाया जाता है। - डा. राजेंद्र कुमार, सीएमएस एमसीएच ज्ञानपुर