जिले में स्थित लगभग 30 सहकारी समितियों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया की उपलब्धता है, लेकिन किसानों की लंबी लाइन टूटने का नाम नहीं ले रही है। किसानों का कहना है कि विभागीय कार्यप्रणाली का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि दूसरे चरण की टाप ड्रेसिंग के लिए बढ़ी मांग के आगे पलक झपकते ही गोदाम खाली हो जा रहे हैं, लेकिन गोदाम प्रभारियों की मांग पूरी करने में विभाग असमर्थ है। सोमवार को कुछ ऐसा ही दृश्य ज्ञानपुर सहकारी समिति पर देखने को मिला, जहां एक ओर यूरिया की निकासी हो रही है तो किसान लंबी लाइन में लग रहे हैं।
समिति पर उमरपुर, चकसुंदरपुर, सरपतहां, मोढ़ से आए किसान रामानंद, सुरेश कुमार, अमरनाथ ने बताया कि वह लगभग एक घंटे से खड़े हैं। गोदाम पर तैनात अधिकारी-कर्मचारी 10-10 किसानों से आधार कार्ड का पंजीकरण और ई-पास मशीन पर अंगूठा लगवाकर जब तक यूरिया की निकासी कराते हैं, तब तक उतनी ही संख्या में अन्य गांवों के किसानों की उपस्थिति लाइन को बढ़ाने में देर नहीं करती। सचिव रामचंद्र ने कहा कि छह सौ बोरी एक खेप में यूरिया प्राप्त हुई, जिसका वितरण कराकर उतनी बोरी की मांग विभाग को भेज दी गई है। दूसरी खेप समय से मिले तो किसानों की मांग पूरी की जा सकती है। एआर सहकारिता आरके शुक्ला ने बताया कि गत माह 2400 एमटी यूरिया का आवंटन मिला था, जिसे क्रमवार 52 में से 30 कार्यरत समितियों पर भेजा गया है। एक सप्ताह में 1300 एमटी दोबारा मिल जाने पर किसानों को परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी।