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बर्निंग ट्रेन बनने से बची दानापुर एक्सप्रेस

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ज्ञानपुर रोड स्टेशन पर खड़ी ट्रेन के कोच लगी आग को बुझाते रेल कर्मी। संवाद - फोटो : BHADOHI
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गोपीगंज। पूर्वोत्तर रेलवे के माधोसिंह-रामबाग रूट पर सोमवार को दानापुर एक्सप्रेस बर्निंग ट्रेन बनने से बच गई। ट्रेन की लगेज कोच से अचानक धुआं निकलते देख हड़कंप मच गया। गेटमैन की सतर्कता से ट्रेन को ज्ञानपुर रोड स्टेशन 20 मिनट तक रोका गया। कर्मचारियों ने सुधार कर आधे घंटे बाद ट्रेन को गंतव्य को रवाना किया।
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सिकंदराबाद से दानापुर तक जाने वाली ट्रेन सोमवार को करीब 11.42 बजे जैसे ही जंगीगंज स्टेशन को जैसे ही पार किया उसके लगेज कोच से धुआं उठता देख पश्चिमी गेट पर तैनात गेटमैन ने स्टेशन मास्टर एसके सिन्हा को सूचना दी। इस ट्रेन को ज्ञानपुर रोड स्टेशन रोक दिया गया। स्टेशन मास्टर ट्रेन चालक जगदीश सिंह समेत अन्य रेल कर्मियों ने ट्रेन के लगेज कोच की जांच की तो पता चला कि ब्रेक जाम होने से धुआं निकल रहा है। तकनीकी दिक्कत सुधारने के बाद ट्रेन को आगे रवाना किया गया। स्टेशन मास्टर एसके सिन्हा ने बताया कि लगेज कोच का ब्रेक जाम होने से धुआं निकल रहा था। यदि ट्रेन को उसी स्थिति में आगे बढ़ाया जाता तो बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता था।
नाकाफी रही पेयजल व्यवस्था, प्यासे रहे यात्री
गोपीगंज। पूर्वोत्तर रेलवे के माधोसिंह-रामबाग रूट का दोहरीकरण होने के बाद स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का अभाव दूर होने का नाम नहीं ले रहा है। विषम परिस्थितियों में ट्रेनों के रुकने पर गर्मी में पेयजल की व्यवस्था नाकाफी रहने से यात्रियों को इधर-उधर भटकना विवशता बन गई है। सोमवार को डाउन दानापुर एक्सप्रेस के लगेज कोच से उठ रहे धुआं के कारण ट्रेन को 20 मिनट तक रुके रहने से यात्री प्लेटफार्म नंबर एक पर पानी की बोतल, डब्बे हाथों में लेकर पानी खोजते रहे। हैंडपंप पर एक साथ लगी भीड़ के कारण कुछ यात्री टोटीयुक्त पेयजल स्टैंड, वाटर कूलर की ओर बढ़े लेकिन वाटर कूलरों में तकनीकी गड़बड़ी ने मायूस कर दिया। स्टेशन मास्टर एसके सिन्हा ने बताया कि गर्मी में हैंडपंप समेत अन्य पेयजल संसाधनों को चालू कराया गया है।
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आधुनिकीकरण में अग्निशमन यंत्रों का है अभाव
गोपीगंज। माधोसिंह-रामबाग रूट का दोहरीकरण हंडिया तक पूरा होने पर आधुनिकीकरण प्रणाली से ट्रेनों संचालन तीव्र गति से कराया जा रहा है। स्टेशन और हाल्टों पर अभी तक ऐसे कोई अग्निशमन यंत्र नहीं लगे हैं, जो 18 से 19 कोच लेकर रफ्तार भरने वाली ट्रेनों में आग के समय त्वरित राहत दे सके। जनसंपर्क अधिकारी वाराणसी रेल मंडल अशोक कुमार ने बताया कि ट्रेन के अंदर अग्निशोधक संयंत्र और स्टेशनों पर बालू, पानी की उपलब्ध कराकर इन दिनों निगरानी बढ़ा दी गई है। हाईड्रेंट की जरूरत पड़ने पर जिलों में कार्यरत फायर विभाग से मदद ली जाती है।
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