कोरोना महामारी के कारण ट्रैक से उतर चुकी शिक्षा व्यवस्था अब स्कूल खुलने से पटरी पर आने लगी है। बेसिक से लेकर उच्च शिक्षा तक के विद्यालयों में कक्षाएं चलने व परीक्षा शुरू होने से विद्यार्थियों में उत्साह है। ऑनलाइन पढ़ाई में करीब 60 फीसदी बच्चे ठीक से शिक्षा नहीं ले सके। हालांकि अब जब वर्चुअल से एक्चुअल पढ़ाई शुरू हुई है तो बच्चों में स्कूल जाने को लेकर उत्साह तो है ही, अभिभावक भी खुश हैं। स्कूल प्रशासन से लेकर अभिभावक तक दो साल की कमी की भरपाई के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
वर्ष 2020 में कोरोना की पहली लहर शुरू होने से करीब चार महीने तक लॉकडाउन रहा। उसके बाद लॉकडाउन में ढील दी गई, लेकिन स्कूल नहीं खुले। बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग का दावा था कि आनलाइन कक्षाएं चलाई गईं, लेकिन नेटवर्क, मोबाइल की समस्या से सभी बच्चों तक शिक्षा की किरण नहीं पहुंच सकी। इससे बेसिक शिक्षा से जुड़े आठवीं तक के छात्र-छात्राएं घरेलू कामकाज से लेकर खेलकूद में ही ज्यादातर व्यस्त रहे। इस स्थिति में पढ़ाई पूरी तरह से प्रभावित हो गई। बच्चों को प्रमोट करने में ढील दी गई तो बच्चे एक कक्षा से दूसरे कक्षा में तो चले गए, लेकिन गुणवत्ता पहले से भी खराब हो गई। अब अभिभावकों को इस बात की चिंता सता रही है कि जब प्रतियोगी परीक्षा होगी तो बच्चे प्रतियोगिता को कैसे पास करेंगे। इसलिए इस चुनौतीपूर्ण कार्य के लिए हर तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। बच्चों को जागरूक करने के साथ ही एक्स्ट्रा (अतिरिक्त) क्लास कराने तक की तैयारी है। अभिभावक सतीश चंद्र गुप्ता ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई तो खानापूर्ति रही। कान्वेंट स्कूल संचालक फीस वसूली के लिए ऑनलाइन पढ़ाई कराते रहे, जबकि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक इस व्यवस्था को पूर्ण नहीं कर पाए। अब ऑफलाइन कक्षाएं शुरू होने से धीरे-धीरे पठन-पाठन शुरू हुआ है। हालांकि जो पढ़ाई प्रभावित हो गई है, उसकी भरपाई आसान नहीं है। इंटरमीडिएट के छात्र अनुज कुमार ने कहा कि कोविड के कारण स्कूल बंद होने से पढ़ाई नहीं हो सकी। जनवरी 2022 से कक्षाएं शुरू हुईं तो स्कूल में कुछ सीखने को मिला। ऑफलाइन पढ़ाई में दिनचर्या व अनुशासन बेहतर होता ही है, साथ ही कुछ सीखने को भी मिलता है। ऑनलाइन क्लास के समय बच्चे ज्यादातर मस्ती ही करते थे। अब जब कक्षाएं शुरू हुई हैं तो सबसे ज्यादा उत्साह छोटे बच्चों में है। अभिभावक प्रमोद दूबे बताते हैं कि अभिभावक ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल तो दे देते थे, लेकिन बच्चे नेटवर्क का बहाना बनाकर केवल मस्ती करते थे। उनका मन भी नहीं लगता था। अब जब स्कूल खुले हैं तो बच्चे नियमित स्कूल जाते हैं। सबसे ज्यादा उत्साहित छोटे बच्चे रहते हैं।