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भ्रष्टाचार को लेकर सुर्खियों में रही कालीन नगरी

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही जीरो टॉलरेंस की बात कर रहे हों, लेकिन विभागों में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। रिश्वत और घोटालों को लेकर कालीन नगरी भी सुर्खियों में रही है। मत्स्य विभाग के अधिकारी की ओर से घूस लेने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके पूर्व राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में हुए घोटाले की आंच जिले में पहुंची थी। अब तक एक दर्जन कर्मचारी भ्रष्टाचार में जेल जा चुके हैं। तहसील से लेकर कलेक्ट्रेट तक के लिपिक इसमें शामिल रहे हैं।
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ब्लॉक, तहसील, थाना आदि प्रमुख स्थानों पर भ्रष्टाचार ने पीड़ितों की कमर तोड़ दी है। कर्मचारी तो कर्मचारी अधिकारी भी बगैर हथेली गरम हुए फाइल आगे नहीं बढ़ाते। शिकायतों का निस्तारण हो अथवा भूमि की पैमाइश, ज्ञानपुर तहसील और कलेक्ट्रेट में लिपिक रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार हो चुके हैं तो भदोही में दो लेखपाल भी जेल जा चुके हैं। साल भर पूर्व कलेक्ट्रेट के अभिलेखागार के रिकार्ड रूम में तैनात शाहिद अली खान को विजिलेंस टीम गिरफ्तार कर चुकी है। इसके पूर्व भदोही तहसील के लेखपाल चंद्रभान सिंह और ज्ञानपुर तहसील के लिपिक अरुण श्रीवास्तव को एंटी करप्शन टीम गिरप्तार कर जेल भेज चुकी है। भूमि अध्याप्ति विभाग की एक महिला कर्मचारी का रिश्वत लेते वीडियो वायरल होने पर निलंबित किया जा चुका है। इसी तरह औराई और भदोही तहसील के कई लिपिकों के वीडियो भी रिश्वत लेते समय वायरल हो चुके हैं। उन पर भी निलंबन की गाज गिर चुकी है।
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