यूपी बोर्ड परीक्षा की तैयारी जिले में अंतिम दौर में पहुंच गई है। निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से परीक्षा कराने के लिए ढाई हजार कक्ष निरीक्षकों की तैनाती कर दी गई है। बृहस्पतिवार को सुबह साढ़े सात बजे से जिले के 90 केंद्रों पर परीक्षा शुरू होगी। इसमें हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 49 हजार 880 परीक्षार्थी शामिल होंगे। परीक्षा की निगरानी के लिए जीआईसी में कंट्रोल रूम बनाया गया है।
जिले में बोर्ड परीक्षा की तैयारी वैसे तो पांच माह पूर्व से चल रही है, लेकिन विधानसभा चुनाव के कारण दो महीने तक प्रक्रिया धीमी गति से चली। बीते 10 मार्च को मतगणना होने के बाद 24 मार्च को परीक्षा की तिथि तय होते ही तैयारी तेज हो गई। जिले के 90 परीक्षा केंद्रों पर होने वाली परीक्षा के लिए तीन जोनल, 10 सेक्टर और 90 स्टेटिक मजिस्ट्रेटों की तैनाती की गई है। केंद्र व्यवस्थापकों संग एक-एक अतिरिक्त केंद्र व्यवस्थापक लगाए गए हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग की मांग पर 1800 बेसिक शिक्षकों को कक्ष निरीक्षक बनाया गया है। बोर्ड परीक्षा में हाईस्कूल में 13604 संस्थागत तथा 38 व्यक्तिगत सहित कुल 13642 बालक और 12 हजार 412 संस्थागत व 12 व्यक्तिगत समेत कुल 12 हजार 424 बालिकाएं शामिल होंगी। इंटरमीडिएट में 11 हजार 266 संस्थागत व 834 व्यक्तिगत सहित कुल 12 हजार 100 बालक और 11 हजार 224 संस्थागत व 492 व्यक्तिगत सहित 11 हजार 716 बालिकाएं परीक्षा में शामिल होंगी। जिला विद्यालय निरीक्षक एनएल गुप्ता ने बताया कि परीक्षा की तैयारी पूरी कर ली गई है। उधर, बोर्ड परीक्षा में कक्ष निरीक्षक बने शिक्षक मंगलवार को दिन भर परिचय पत्र को लेकर परेशान रहे। अबकी बार बोर्ड की वेबसाइट से ऑनलाइन डाउनलोड कर परिचय पत्र मिलना था। जिसको लेकर स्कूल से लेकर डीआईओएस कार्यालय तक हलचल बनी रही। उधर, बोर्ड परीक्षा में परिषदीय शिक्षकों की ड्यूटी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ऑनलाइन लगाई गई ड्यूटी में कई स्कूलों के सभी शिक्षकों को कक्ष निरीक्षक बनाया गया है। इससे स्कूलों में पठन-पाठन प्रभावित होने की बात भी कही जा रही है। अभोली ब्लॉक के कई स्कूलों में ऐसा मामला सामने आया है। ब्लॉक अध्यक्ष भूपेंद्र कुमार यादव ने बताया कि इंग्लिश मीडियम स्कूल गौरा के सभी शिक्षकों की ड्यूटी बोर्ड परीक्षा में लगा दी गई है। आदर्श प्राथमिक विद्यालय प्रयागपुर, आनंदडीह, हरिकरनपुर समेत कई स्कूलों के सभी शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। इसको लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पदाधिकारियों ने मंगलवार को बीएसए से मिलकर ज्ञापन सौंपा। उनका कहना था कि इससे परिषदीय स्कूलों में परीक्षा संग पठन-पाठन भी प्रभावित होगा।