ज्ञानपुर। मोहर्रम मंगलवार को परंपरागत ढंग से मनाया गया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दर्जनों ताजिया इमाम चौक से उठकर कर्बला में ठंडे किए गए। इस दौरान या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। अखाड़ेदारों ने जंगी जौहर का जोशपूर्ण प्रदर्शन किया। कर्बला में नगर और ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे दर्जनों ताजियों के ठंडा होने के बाद ही पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली। कर्बला पहुंचने के लिए निकाले गए जुलूस में दर्जन भर से अधिक अखाड़ेदारों ने फन-ए-सिपहगिरी का अद्भुत प्रदर्शन कर हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद ताजा की। जुलूस में चल रहे एक से बढ़ कर ताजिया का निर्माण करने वाले ताजियादारों को पुरस्कृत किया गया। महिलाएं आंखों में आंसू लिए ताजिया को कर्बला पहुंचा कर मुरादें मांग रहीं थीं। चौक से ताजिया उठने के समय से ही शुरू हुआ शिरनी चढ़ाने का क्रम देर शाम तक चलता रहा। गोपीगंज प्रतिनिधि के अनुसार-हजरत इमाम हुसैन ने अपने 71 साथियों और रिश्तेदारों के साथ शहादत देकर दुनिया के सामने पैगाम दिया कि ऐ हक परस्त कभी भी बातिल के आगे सिर न झुकाना। चाहे वह कितना ही ताकतवर और जालिम क्यों न हो। इमाम हुसैन ने कर्बला में यजीद जैसे बातिल परस्त को पूरी तरह से बेनकाब करके उसका घिनौना चरित्र सबके सामने ला दिया। नगर के चुड़ीहारी मोहाल, शेख सलामत अली खां अखाड़ा के सरदार सरवर खां के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया। सराय मोहाल से अखाड़ा धूम खां के सरदार मोहम्मद हनीफ, अखाड़ा गुलाम मुस्तफा सोनिया तालाब, पूरेगुलाब, अमवां, मेवाडापुर, जोहरपुर-नईबस्ती, मुजाहिद नगर, गहरपुर, धनापुर, कौलापुर, गिराई पावर हाउस, बरजी-डेरवा, खानापुर, गांधी के ताजियादारों ने अपने-अपने जुलूस और अखाड़ों के साथ करतब दिखाते हुए मिलान कर कर्बला में ताजियों को दफन कर ठंडा किया। जुलूस मौसिम खान, डॉ. सगीर खां, गुड्डू चूड़िहार, मुन्नू चूड़िहार, एबरार चूड़िहार, रजा खां, ऐनउल हक, हलीम प्रधान, हाजी लालमोहम्मद, गुलाम मुस्तफा अंसारी, मो.नियाज फारुकी, मुस्तफा फारूकी, हाफिज अशरफ, मो. कासिम राईन, बुद्घू कुरैशी, मंसूर कुरैशी, अख्तर फारुकी, पिंटू राय, अजहरुद्दीन, गुड्डू चौधरी, माबूद खां, रईस खां आदि के साथ निर्धारित रास्तों से हुए राजमार्ग स्थित कर्बला पर नम आंखों से ताजिये को दफन करने के बाद फातिहा पढ़े गए। सुरक्षा के तहत सीओ सदर कालू सिंह, कोतवाल संजय राय, चौकी के इंचार्ज सुशील कुमार तिवारी पीएसी और पुलिस बल के साथ मुस्तैद रहे। सुरियावां प्रतिनिधि के अनुसार-नगर क्षेत्र के एक दर्जन गांवों से निकला ताजिया जुलूस लागी बाजार बावन बीघा तालाब कर्बला पर ले जाकर दफन किए गए। लागी बाजार कर्बला पर भटेवरा के बरकत अली, पुरानी बाजार त्रिमुहानी ताजिया, सुरियावां नेहरू नगर ताजिया, कुंदीपुर-गांधी नगर वार्ड नंबर 13 का ताजिया भ्रमण करते हुए बिहियापुर-पुरानी बाजार होते हुए पहुंचा। इस मौके पर चौकीदार जिलानी, शफीक अंसारी सभासद, फारूक एडवोकेट, मुख्य कारीगर अब्दुल गनी, जलील अहमद, मुस्तफा, अतहर अली, मुस्ताक, इकबाल अहमद, अहमद अली, इकरार, नदीम आदि रहे। ताजिया जुलूस में कुंदीपुर का ताजिया छोटा शरीफ फकीर मकदूम शाह-अकबरपुर आकर्षक रहा। तो वहीं कर्बला बावन बीघा तालाब पर फाटकगली, गहरपुर, तुलापुर, पुरानी बाजार, सुभानगंज, खरगपुर, भीमसेनपुर, फकीरान का तकिया में काशी नरेश की ओर से सौ रुपये मिलने वाले सहयोग का ताजिया ठंडा किया गया। इस मौके जगह अब्दुल रऊफ हाशमी, मकबूल, रहीश, खालिक,गुड्डू, सानू, हसनैन जुलूस को सकुशल पहुंचाने में लगे रहे। दोनों कर्बला पर लगे मेले में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बढ़चढ़ कर मेला का आनंद उठाया। कोतवाल विजय प्रताप सिंह मय फोर्स चक्रमण करते रहे। इसी तरह मतेथू, मंगुरा आदि स्थानों पर बने कर्बला पर ताजिया ठंडे किये जाते रहे।
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आकर्षण का केंद्र बना रहा इमाम रौजा का ताजिया
गोपीगंज। नगर में निकले मोहर्रम के जुलूस में इस बार इराक स्थित इमाम हुसैन रौजे का प्रतीक बना ताजिया आकर्षण का केंद्र बना रहा। शेख सलामत अली अखाड़े में शामिल इस ताजिए का निर्माण मो. हनीफ लल्लू ने कराया था। ताजिया को बनाने में आफताब अहमद और बबलू ने लगभग 20 दिन में तैयार किया। पूरी तरह शीशे से निर्मित इस ताजिए को बनाने में लगभग पचास हजार रुपये खर्च भी आया। विभूति नारायण सिंह ने ताजियादारों को सम्मानित कर हौसला बढ़ाया गया। महाराजगंज प्रतिनिधि के अनुसार-क्षेत्र के चकापुर, पटखौली, हुसैनीपुर, कंसापुर गांवों से निकले ताजिया महाराजगंज कर्बला पर जुलूस के रुप में पहुंच कर दफन किए गए। इस मौके पर यासीन शाह उर्फ करिया समेत बड़ी संख्या में ताजियादार रहे। सुरक्षा में औराई पुलिस लगी रही। इसी तरह बाबूसराय, औराई, उगापुर, खमरिया नगर, अहिमनपुर, लालानगर, औरंगाबाद, माधोसिंह आदि क्षेत्रों से निकले ताजिये संबंधित स्थानों पर स्थित कर्बला पहुंचे।
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मिश्राइनपुर में हुई झड़प
दुर्गागंज। थानाक्षेत्र के मिश्राईनपुर-दुर्गागंज ताजियादारों और पुलिस के बीच चले काफी देर तक झड़प से लोगों में अफरातफरी मची रही। पुलिस नई परंपरा को कायम न होने पर अड़ी रही तो वहीं ताजियादार अपनाने पर। बताते हैं कि उक्त गांव के ताजियादार पहले भागीरथीपुर कर्बला पर रास्ता विवाद और जलजमाव के कारण तीन साल से जाना छोड़ दिए थे। इस वर्ष ताजियादारों ने भागीरथीपुर कर्बला पर जाने के लिए जैसे ही चौक से ताजिया उठाया, वैसे पुलिस ने उन्हें रोक दिया। मामला न बिगड़ने पाए, इसलिए उपनिरीक्षक श्यामबिहारी यादव दलबल के साथ डटे रहे। अंतत: ताजियादारों को समझाबुझाकर मना लिया गया। इस मौके पर मो. फारुख, मो. इम्तियाज, गुलफाम, वाहिद, पीर मोहम्मद, मो.इदरीश, मो. हारून, शमशाद, सकलैन, नसीर, रोजन आदि मौजूद रहे।
ऊंज प्रतिनिधि के अनुसार-क्षेत्र के दरवांसी, सूफीनगर, मैलौना, गोधना, नवधन-नटबस्ती, ऊंज-मुंगरहा, कुरमैचा के ताजिये कर्बला सूफीनगर और सुधवै-वहिदानगर, सुभाषनगर के ताजिये कर्बला सुभाषनगर में जुलूस की शक्ल में पहुंच कर दफन हुए।
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50 किलो चांदी से बना ताजिया
घोसिया। क्षेत्र के माधोसिंह में चंदे व दान से बने 50 किलो चांदी के ताजिये को हर एक निगाह निहारती रही। लगभग 10 फीट के चांदी का ताजिया जुलूस की शोभा भी बढ़ाता रहा। कर्बला लेकर जाकर ताजिए को दफन किया गया। इस मौके पर डॉ. सनवारुल हक, ताजियादार निजामुद्दीन, मुस्तफा अली, रमजान अली आदि रहे। इसी तरह भवानीपुर, कठारी, पियरोपुर, महथुआ, नगर पंचायत घोसिया में मोहर्रम का पर्व सकुशल संपन्न हो गया। जानकारों ने बताया कि गमी और मातम के रूप में मोहर्रम को मनाया जाता है इसी दिन इमाम हुसैन की शहादत मैदाने कर्बला में हुई थी। इमाम अली, इमाम हुसैन से ही इस्लाम का कुनबा चला। इमाम हुसैन के पूरे कुनबे की शहादत मोहर्रम की एक तारीख से 10 तारीख के बीच हुआ। इस लिए इमाम हुसैन की याद में यह ताहजिया निकालकर उनकी शहादत का मातम मनाया जाता है। लोग रोजा रहकर उनकी शहादत को याद करते है। जगह-जगह लंगर के भी आयोजन रखे गये। सभी ताजिया पूर्व मुहल्ला तकिया पर आकर इकट्ठा हुये। मेन बाजार सराफा मंडी से होते हुए ईदगाह के कर्बला में दफन किए गए। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस पैनी नजर रखे रही। इस मौके पर पूर्व चेयरमैन नुमान अहमद, सभासद काजू चौधरी, मेराज अली, शेख जमील, मो.रुख़सार अहमद आदि रहे।
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चौक से नहीं उठ सका ताजिया, रही नाराजगी
ऊंज। थाना क्षेत्र के सुधवैं-वहिदानगर के राजमार्ग स्थित नईबस्ती में इस वर्ष भी ताजिया को पुलिस प्रशासन ने चौक से नहीं उठने दिया। पुलिस सुभाषनगर कर्बला ले जाने की बात कहती रही, लेकिन ताजियादार अब्दुल समद, आलमगीर, मकबूल, मो. हसन, साबिर अंसारी सूफीनगर कर्बला पर ले जाने के लिए अडिग रहे। अंतत: मिट्टी को ही लेकर सुभाषनगर में भदफन किया गया। नाराजगी जताते हुए ताजियादारों ने कहा कि जब नईबस्ती में हैं तो अपने नजदीकी कर्बला में जाएंगे, लेकिन पुलिस हम लोग जिस स्थान को छोड़कर आए हैं उसी स्थान पर जाने को विवश कर रही है। मामला छह वर्षों से लटका हुआ है। न तो जिला प्रशासन इसके लिए अनुमति दे रहा है और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
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दो दिन रहेगा गम, नहीं जलेंगे चूल्हे
ज्ञानपुर। मान्यता है कि 10वीं मोहर्रम पर कर्बला में ताजियों के दफन होने के बाद जब तक तीजा नहीं बीत जाएगा, तब तक मुस्लिम समाज गम में रहकर चूल्हा नहीं जलाएगा। नौवीं देर रात में ही चूल्हे आदि जलाकर तबर्रुख के रूप में बनने वाला मलीदा बना लिया जाता है। चौक पर ले जाकर फातिहा के बाद शिरनी बांटी जाती है। खिचड़ा और मलीदा ही दो दिन तक भोजन के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।
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