फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अंबे है मेरी मां जगदंबे है मेरी मां...से गूंजा नगर

विज्ञापन
विज्ञापन
ज्ञानपुर। अंबे है मेरी मां.. जगदंबे है मेरी मां..., चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है... जैसे भक्तिगीतों से शनिवार को वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने घंटे घड़ियाल व जयकारों की गूंज के बीच तृतीय स्वरूप माता चंद्रघंटा की पूजा अर्चना कर दरबार में मत्था टेका और सुख शांति देने की प्रार्थना की।
विज्ञापन

नवरात्र के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने देवी के तृतीय स्वरूप चंद्रघंटा की पूजा अर्चना कर दरबार में मत्था टेका और सुख शांति देने की प्रार्थना की। नारियल, चुनरी, बताशा, माला फूल चढ़ाकर पूजन कर श्रद्धालुओं ने मन्नतें मांगीं। माता के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। सुबह से शाम तक पूजा पाठ का क्रम चलता रहा। जिसके चलते हर कहीं पर वातावरण भक्तिमय नजर आया। देवी के जयकारे व वैदिक मंत्रोच्चार की गूंज रही। पं. दीनानाथ शुक्ल के अनुसार, धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि मां चंद्रघंटा की उपासना से भक्तों में वीरता और निर्भीकता के साथ ही सौम्यता और विनम्रता की प्राप्ति होती है। भोर से ही भक्त देवी पूजन की तैयारियों में लग गए। इस दौरान शारीरिक दूरी का पालन किया गया। मंदिर समितियों ने पुरुष व महिला भक्तों के लिए अलग लाइन बनाई थी। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ देवी चंद्रघंटा का पूजन कर सुख, शांति देने की प्रार्थना की। दरबार में मत्था टेक जयकारे लगाए। पूरे दिन पूजा पाठ का क्रम चलता रहा। लोगों ने घरों में दुर्गा सप्तसती का पाठ कर भजन कीर्तन किया। जिससे वातावरण भक्तिमय बना रहा। वैदिक मंत्रोच्चार की गूंज दिनभर वातावरण में सुनाई देती रही। माता के जयकारों से देवी मंदिर व पांडाल गूंजते रहे। ग्रामीण अंचलों में भी मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप की पूजा अर्चना करते हुए श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर सुख समृद्धि की कामना की।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें