जर्जर स्कूलों में कक्षाओं का संचालन रुक नहीं रहा है। मंगलवार की सुबह सुरियावां के पूर्व माध्यमिक विद्यालय महजूदा के छत का एक हिस्सा अचानक गिर गया। इससे छत को देख रहे ग्राम प्रधान राजमणि पांडेय और राजमिस्त्री बाल-बाल गच गए। संयोग अच्छा था कि उस समय बच्चे प्रार्थना कर रहे थे। छत टूटने के बाद बच्चों को कक्षा के बाहर ही पढ़ाया गया। बीएसए ने पूरे प्रकरण में खंड शिक्षा अधिकारी से रिपोर्ट तलब की है।
जिले में 892 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालय (एक परिसर में दोनों) संचालित है। जिसमें करीब पांच हजार से अधिक भवन पठन-पाठन के लिए बने हैं। कोरोना वायरस की दूसरी लहर के कारण 23 अगस्त से पूर्व माध्यमिक जबकि एक सितंबर से प्राथमिक विद्यालयों में पठन-पाठन शुरू हुआ। जिसमें एक लाख 80 हजार बच्चे पंजीकृत है। विभागीय सर्वे में 250 के करीब भवन जर्जर हो चुके हैं, लेकिन अब भी कई स्कूल के जर्जर भवन में कक्षाएं चलाई जा रही है।
मंगलवार की सुबह करीब आठ बजे सुरियावां के पूर्व माध्यमिक विद्यालय महजूदा की छत को देखने के लिए ग्राम प्रधान और राजगीर मिस्त्री देखने के लिए चढ़ेे। उसी दौरान छत का एक हिस्सा अचानक गिर गया। संयोग अच्छा रहा कि बच्चे उस समय प्रार्थना में शामिल होने गए थे। छत का एक हिस्सा गिरने की खबर से खलबली मच गई। बड़ी संख्या में अभिभावक मौके पर जुट गए। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारी से स्कूल की स्थिति की पूरी रिपोर्ट तलब की है। स्कूल के जीर्णोद्धार के लिए शासन स्तर से बजट की मांग की जाएगी। ग्राम प्रधान राजमणि पांडेय ने कहा कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर छत को देखने के लिए गया, लेकिन अचानक उसका एक हिस्सा गिर गया। बताया कि आपरेशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों में 19 पैरामीटर के तहत कार्य कराया जाना हैं।