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पांच साल में लगे 50 लाख पौधे, वन क्षेत्र बढ़ा

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एक पेड़ काटने पर दो लगाने होंगे, इसी शर्त पर ही वन विभाग की ओर से कटान का परमिट जारी होता है। इस नियम का मखौल इस कदर उड़ाया जा रहा है कि शहर में तेजी से पेड़ काटे तो जा रहे हैं लेकिन उस अनुपात में पौधरोपण नहीं हो रहा है। इसी का नतीजा है कि चारों ओर कंक्रीट के जंगल दिखाई दे रहे हैं।
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पर्यावरण संरक्षण की मुहिम के दौरान हर साल पौधरोपण होता है। 2017 से लेकर 2021 तक 50 लाख से अधिक पौधे कागज पर लगाए गए हैं। जिसका असर भी 2021 के सर्वे रिपोर्ट में दिखा, लेकिन उम्मीद के हिसाब से नहीं। मखमली कालीनों के लिए दुनिया भर में मशहूर भदोही में धरती के सबसे खूबसूरत आभूषण हरियाली को दबे पांव कुचला जा रहा है। यहां पेड़-पौधों की संख्या गिनती की होकर रह गई है। ज्ञानपुर, गोपीगंज, भदोही नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में वैध एवं अवैध प्लाटिंग के चलते पेड़ पौधों की कटाई कर दी जाती है। यही नहीं, विकास परियोजनाओं के नाम पर भी पेड़ों की कटाई होती है, लेकिन उनके स्थान पर लगने वाले पौधे संरक्षित नहीं हो पाते।
वर्ष 2019 से अब तक में जिले के कुल क्षेत्रफल में 0.37 फीसदी वन क्षेत्र का इजाफा हुआ है। यानी 2019 में जो दायरा 3.12 वर्ग किमी था, वह अब बढ़कर 3.71 वर्ग किमी हो गया है। जिले में कुल जंगल वाले क्षेत्र में 0.59 वर्ग किमी की बढ़ोत्तरी हुई है। प्रभागीय वनाधिकारी भदोही नीरज आर्य ने बताया कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जारी द्वि वार्षिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में भदोही जिले का वन क्षेत्र बढ़ा है। यह भविष्य के लिए अच्छा संकेत है।
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