ज्ञानपुर। कालीन नगरी में चिकित्सकों की कमी से सरकारी अस्पतालों दशा ठीक नहीं है। बारिश शुरू होते ही मच्छर जनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगता है। इसकी चपेट में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक आते हैं। बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर तो कसी है, लेकिन डॉक्टरों की कमी खल रही है। पूरे जिले के सरकारी अस्पतालों में 40 फीसदी चिकित्सकों के पद खाली हैं। बड़े अस्पतालों में महाराजा चेत सिंह जिला चिकित्सालय व महाराज बलवंत सिंह चिकित्सालय में हृदय रोग विशेषज्ञ तक नहीं हैं। ईएनटी का भी अभाव है। पूरे जिले में 82 में से 50 की तैनाती है। यानी 32 पद खाली हैं।
बारिश के दिनों बीमारी से निपटने के लिए संचारी रोग अभियान जिले भर में चलाया जा रहा है। एमसीएस और बलवंत सिंह चिकित्सालय में डेंगू और मलेेरियां से निपटने के लिए अलग से एक वार्ड बनाया गया है। जिसमें दस बेड अतरिक्त रखा गया है। वहीं, सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पांच पांच अतरिक्त बेड़ों की संख्या बढ़ा दी गई है। 17 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर दो-दो बेडों की संख्या अतरिक्त है। इस प्रकार से स्वास्थ्य विभाग मच्छर जनित बीमारी को देखते हुए कुल 84 अतिरिक्त बेड़ों की संख्या बढ़ा दी गई है। मौसम में बदलाव होने के कारण इन दिनों अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। लेकिन, करीब-करीब सभी अस्पतालों में डॉक्टरों का अभाव है। जिला अस्पताल प्रशासन के अनुसार, अस्पताल में कुल 20 डॉक्टर होने चाहिए, जिसमें से महज 15 डॉक्टर हैं। यहां हार्ट, बच्चों के, नाक काल गला के जैसे महत्वपूर्ण डॉक्टर नहीं हैं। वहीं हाल महाजा बलवंत सिंह का है। यहां भी हार्ट और ईएनटी नहीं हैं।