ज्ञानपुर। मच्छरों से बचाव के लिए स्वच्छता में ग्राम स्वच्छता समितियां फेल साबित हो रही हैं। इसकी वजह इसमें रुचि नहीं लेना बताया जा रहा है। स्थिति यह है कि 546 ग्राम पंचायतों में अनटाइड फंड (निर्बंध राशि) में भेजे गए 70 लाख में से 25 लाख रुपये से अधिक डंप हैं। नए प्रधानों के आने और बैंक खाता बदलने के कारण समस्या जटिल हो गई है। अधिकतर ग्राम पंचायतों में फंड की रकम पर प्रधानों की नजर है।
बारिश में जलभराव के चलते डेंगू, मलेरिया, कालाजार सहित अन्य मच्छर जनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है। शासन के निर्देश पर हर साल स्वास्थ्य विभाग प्रत्येक ग्राम पंचायतों में ब्लीचिंग के छिड़काव, लार्वा नष्ट करने सहित अन्य जरूरी दवा, उपकरण खरीद के लिए 10-10 हजार रुपये भेजता है। एएनएम सेंटर वाले 162 गांवों में 10 की बजाए 20-20 हजार की धनराशि भेजी जाती है। इसका संचालन ग्राम प्रधान, आशा और प्रधान- एएनएम के संयुक्त खाते से किया जाता है। 546 ग्राम पंचायतों में करीब 70 लाख रुपये अनटाइड फंड वित्तीय वर्ष में भेजे गये। वर्तमान में डेंगू, मलेरिया आदि संक्रामक बीमारियां फैली हैं लेकिन गांवों की स्वच्छता समितियां सफाई और छिड़काव के प्रति गंभीर नहीं हैं। गंभीर स्थिति वाले क्षेत्रों में तो स्वास्थ्य विभाग की टीमें पहुंचकर दवाओं का छिड़काव कर देती हैं, लेकिन अन्य गांवों में बिना दवा छिड़काव के अनटाइड फंड का दुरुपयोग किया जा रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी रामआसरे पाल की मानें तो नए प्रधानों और बैंकों का नाम बदलने के कारण 250 से अधिक गांवों की धनराशि अभी डंप है। इसमें सुधार के लिए पत्र भेजा गया है।