ज्ञानपुर। महिलाओं से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए बनाए गए महिला थाने में ज्यादातर पारिवारिक मामले पहुंच रहे हैं। ज्ञानपुर में बने महिला थाने में जनवरी से लेकर अब तक 198 शिकायतें दर्ज कराई गईं, जिसमें 95 फीसदी महिला उत्पीड़न के मामले रहे। इस दौरान केवल 13 मुकदमे दर्ज किए गए, जबकि पुलिस 90 परिवारों को टूटने से बचाने का दावा कर रही है। उन्हें समझा-बुझाकर राजी कर लिया गया।
महिलाओं को न्याय की उम्मीद से जिले में स्थापित महिला थाने में परिवारों को सहूलियत मिल रही है। महीने के दूसरे और चौथे रविवार को थाने में स्थित परिवार परामर्श केंद्र पर बिछुड़ते परिवारों को एक करने का प्रयास किया जाता है। इसके लिए एक से लेकर तीन-तीन घंटे तक काउंसिलिंग की जाती है। रविवार को तीन बिछुड़ते परिवार काउंसिलिंग के बाद एक साथ जाने के लिए राजी हुए। इसमें बभनौटी की विवाहिता को ससुराल वाले राघोपुर लिवाकर गए। इसी तरह दो अन्य परिवार भी राजी-खुशी से रहने को तैयार हुए। ज्यादातर मामलों में पति और ससुराल वालों का सहयोग न मिलने का आता है।
विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जनवरी से नवंबर 2018 तक महिला उत्पीड़न से जुड़ी 198 शिकायतें आईं। परिवार परामर्श केंद्र के माध्यम से सभी मामलों पर सुलह-समझौते का प्रयास किया गया। इनमें 90 परिवार एक साथ रहने को राजी हुए, जबकि 13 जटिल मामलों में केस दर्ज किया गया। थाना प्रभारी शोभा पांडेय, महिला कल्याण बोर्ड की सदस्य केएनपीजी कॉलेज की मनोविज्ञान विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू, गृह विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉ. मनीषा और सीडब्ल्यूसी के डॉ. अनिल श्रीवास्तव महिलाओं की काउंसिलिंग करते हैं। मकसद रहता है परिवार को टूटने से बचाया जाए। नोडल अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने कहा कि महिला थाने से परिवारों को काफी सहूलियत मिल रही है। महिला सिपाही एवं अधिकारियों के सामने परेशान होने वाली महिलाएं खुलकर अपनी बात बताती हैं, जिससे उन्हें राहत देने का प्रयास किया जाता है।