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तटबंध पर हो रहा रिसाव बाढ़ खंड के कर्मी व श्रमिक गायब

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तटबंध पर हो रहा रिसाव, बाढ़ खंड के कर्मी व श्रमिक नदारद
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- ग्रामीणों को सता रहा खतरे का डर
संवाद न्यूज एजेंसी
सिकंदरपुर। कुसमौर घाट अइलहवा के बीच मनोरमा नदी के तटबंध पर बाढ़ खंड के तमाम प्रयास के बाद पानी तो रुका, मगर रिसाव अब भी जारी है। पानी का बहाव ठहरने के बाद बाढ़ खंड के कर्मी श्रमिकों के साथ मौके से चले गए हैं। इधर भयाक्रांत ग्रामीण यह कह रहे हैं कि धीरे-धीरे हो रहा रिसाव खतरे का संकेत है। ऐसे में यह डरा सता रहा है कि कहीं बहाव तेज न हो जाए, जिससे एक बार फिर संकट बढ़े।
उल्लेखनीय है कि 21 सितंबर की रात कुसमौर घाट से अइलहवा के बीच तटबंध पर स्थित पुलिया की दीवार टूट जाने की वजह से तटबंध में तेज गति से पानी आबादी की तरफ बढ़ रहा था। इसकी भनक लगने के बाद बाढ़ खंड के जिम्मेदार व ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए। इसके बाद बचाव कार्य तेज गति से हुआ। पूरी रात व 22 सितंबर को दिन भर के अथक प्रयास से पानी का बहाव तो ठहर गया, मगर वर्तमान में भी धीरे-धीरे तटबंध से रिसाव जारी है। क्षेत्र के कुसमौर घाट, अइलहवा, जाटवलिया, हडही, गोविंदापुर, लाला, गोरया और करिगहना समेत करीब दर्जन भर गांव के किसानों के खेतों में नदी का पानी भर गया है। किसानों का कहना है कि उन्हें फसल नष्ट होने का डर सताने लगा है। क्षेत्र के किसान गंगाराम चौधरी, हनुमान शरण, गौकरण और रामदास कहते हैं कि पिछले दिनों लगातार मूसलाधार बारिश से धान के खेतों में पानी भरा था। उस पर तटबंध की पुलिया की दीवार टूट गई। इसके चलते नदी का पानी और अधिक जमा हो गया है। इधर धान की फसल तैयार है, 10 दिन के अंदर काटने लायक हो जाएगी, लेकिन लग रहा है कि इस साल धान की फसल पानी की वजह से खेतों में नष्ट हो जाएगी।
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बाढ़ खंड के अवर अभियंता प्रदीप कुमार ने कहा कि तटबंध पर रिसाव मिट्टी के नीचे से निकलने वाला पानी का है। यह धीरे-धीरे बंद हो जाएगा। खतरे जैसी कोई बात अब नहीं रह गई है।
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बोले किसान, धान के खेतों में भरा है पानी
बस्ती। हड़ही गांव उत्तर दिशा में किसानों के धान खेतों में लबालब पानी भर गया है। गांव के साहब पाठक, जगदीश पाठक, संतराम, राम सिंह, काली प्रसाद, बेचू प्रजापति और पतिराम सोनकर कहते हैं कि सैकड़ों बीघे धान की फसल लबालब पानी, से भर गई है। जिससे फसल पूरी तरह से चौपट हो गई है। किसानों का कहना है कि धान की फसल तो बारिश और नदी के पानी भर जाने की वजह से चौपट हो गई, तराई क्षेत्र होने के कारण इस बार गेहूं की बुआई भी नहीं हो पाएगी।
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