वाटर बॉटलिंग प्लांट को लेना होगा लाइसेंस
बिना लाइसेंस पाए जाने पर छह से 12 वर्ष तक की सजा का है प्रावधान
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। भूगर्भ जलदोहन करके उद्योग चलाने एवं वॉटर बॉटलिंग प्लांट चलाने वालों को अब लाइसेंस लेना होगा। ऐसा नहीं करने पर छह से 12 वर्ष तक की कारावास एवं आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा।
जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित भूगर्भ जल समिति की बैठक में निर्देश दिया है कि एसडीएम की अध्यक्षता में गठित टास्क फोर्स अपने तहसील क्षेत्र में सर्वे करके ऐसे उद्योगों की सूची तैयार करे। भूगर्भ जल विभाग लाइसेंस नहीं लेने पर नोटिस जारी करेगा, जिसके बाद वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए डीएम ने 15 दिन का समय निर्धारित किया है। बैठक में सीडीओ डॉ. राजेश कुमार प्रजापति, एएसपी दीपेंद्र नाथ चौधरी, अधिशासी अभियंता सिंचाई राकेश कुमार गौतम, सहायक अभियंता लघु सिंचाई डॉ. राजेश कुमार, ईओ नगर पालिका अखिलेश त्रिपाठी, चैंबर्स आफ इंडस्ट्री एंड कामर्स के अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह, महामंत्री हरीश चंद शुक्ल एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
जिले में हैं 200 बॉटलिंग प्लांट
जनपद में करीब 200 बॉटलिंग प्लांट क्रियाशील है। अभी तक उद्योग विभाग से ही पंजीकरण कराने के बाद प्लांट को शुरू किया जा सकता था, लेकिन अब इसके लिए भूगर्भ जल विभाग से भी लाइसेंस अनिवार्य कर दिया गया है। चैंबर्स ऑफ कामर्स के अध्यक्ष अशोक सिंह ने बताया कि शहरी क्षेत्र में 20 बॉटलिंग प्लांट और ग्रामीण क्षेत्र में करीब 180 बॉटलिंग प्लांट चल रहे हैं।