छुट्टा पशुओं को लेकर ग्रामीणों का प्रदर्शन
बस्ती। पैकोलिया थाने के सेखुई से ट्रक से बरामद गोवंशीय पशुओं को गोशाला में पहुंचाने के दौरान सोमवार सुबह घंटों रस्साकशी होती रही। दुबौलिया और पैकोलिया थाने की पुलिस की कोशिश के बावजूद ग्रामीणों ने रमना तौकीर स्थित गोशाला में पशुओं को नहीं छोड़ने दिया। रमना तौफीर के अलावा क्षेत्र के सांडपुर, बरदिया, चपरा, हेंगापुर आदि गांवों के सैकड़ों ग्रामीण प्रदर्शन करने लगे तो पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। पुलिस की ग्रामीणों से टकराव की नौबत तक आ गई।
आखिरकार पैकोलिया पुलिस को ट्रक पर लदे मवेशियों को लेकर लौटना पड़ा। इस दौरान चार पशुओं की मौत हो गई। मृत मवेशियों को पुलिस ने उसी गोशाला के बगल में पोस्टमार्टम कराने के बाद दफन करा दिया, जबकि दो जानवर भाग गए। बाकी बचे 13 मवेशियों को पुलिस पैकोलिया थाना क्षेत्र के आमा गांव की गोशाला में शिफ्ट कर दिया है। तब जाकर प्रशासन ने राहत की सांस ली। दुबौलिया के इंस्पेक्टर पंकज सिंह, पैकोलिया के थानाध्यक्ष दुर्गा प्रसाद ने बताया कि पशुओं का माकूल इंतजाम कर दिया गया है।
सेखुई बाग में पकड़ा गया ट्रक
पैकोलिया। हर्रैया-बभनान मार्ग पर पूर्व माध्यमिक विद्यालय सेखुई के पास रविवार/सोमवार रात करीब एक बजे दबिश देकर पुलिस ने पशुओं से भरा ट्रक पकड़ा। इसमें मवेशी (सांड़) लदे थे। मुखबिर की सूचना पर यूपी-100 टीम सबसे पहले पहुंची। पशुओं का देख थाने पर सूचना देकर फोर्स बुलाया। उपनिरीक्षक उमा शंकर त्रिपाठी हमराहियों के साथ पहुंचे, तब तक तस्कर ट्रक छोड़ फरार हो गए। पुलिस ट्रक लेकर दुबौलिया थानाक्षेत्र के रमना तौफीर गोशाला पहुंची, जहां ग्रामीणों की नाराजगी के कारण पुलिस को लौटना पड़ा। पैकोलिया क्षेत्र में चर्चा है कि सौ मीटर की दूरी पर स्थित परसा तिराहे पर थाने की पुलिस एवं डायल 100 टीम मौजूद रहती है। इसके बावजूद तस्करों ने साहस कैसे जुटा लिया। उस बाग में बड़े पैमाने पर पशुओं को एकत्रित कर गैर प्रांत भेजा जाता है।
चारदीवारी की जगह गड्ढा, भाग रहे जानवर
दुबौलिया। ग्रामीणों का गुस्सा यूं ही नहीं छलका। रमना तौफीर, सांडपुर, बरदिया, चपरा, हेंगापुर आदि गांवों के किसान लाठी लेकर पुलिस के सामने खड़े होने का साहस कतई नहीं करते। मगर लगातार फसलों के बर्बाद होने से परेशान हैं। कमल, गप्पू, अनिल, मोनू, मुकेश, अखिलेश, अमरजीत, संतोष, धर्मेंद्र आदि का कहना है कि वे पशुओं को यहां लाने के खिलाफ नहीं हैं, मगर उनका प्रबंध किया जाए। आरोप है कि एक करोड़ बीस लाख की लागत से गोशाला का निर्माण कराया गया। चारों तरफ चारदीवारी की जगह सिर्फ गड्ढा खोद दिया गया। जहां से छुट्टा पशु फसलों को चरने पहुंच जाते हैं। सैकड़ों की संख्या में झुंड बनाकर गोवंशीय पशु खुले में टहल रहे हैं। दो अस्थाई कर्मचारी तैनाती हैं जो रात में गोशाला छोड़ देते हैं।