गरीबों के इलाज के लिए जांच के अलावा दवाएं भी सरकार अस्पतालों से फ्री हैं। जिम्मेदारों की मनमानी शासन की मंशा पर पानी फिर रहा है। ऐसी स्थिति जिला महिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड को लेकर है। एडी हेल्थ और सीएमओ के बीच खींचतान में अल्ट्रासाउंड सेंटर पर ताला लटक रहा है। मरीज बाहर के सेंटरों पर भारी रकम खर्च कर अल्ट्रासाउंड कराने को मजबूर हैं। सुविधा अब कागजों तक ही रह गई है।
जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेंटर पर पिछले नौ माह से ताला लटक रहा है। जिले में दौरे पर आए शासन के अधिकारी और मंत्री के निर्देश का भी यहां जिम्मेदार पालन करने में आनाकानी कर रहे हैं। मंडलीय अधिकारी अपनी जिद पर अड़े हैं तो सीएमओ उन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते नहीं अघा रहे हैं। इनके बीच मरीज पिस रहा है।
पिछले दो माह से चल रही खींचतान
एडी हेल्थ सीके शाही ने पिछले दिनों एक रेडियोलॉजिस्ट को यहां संबद्ध किया। एक दिन सेंटर का ताला खुला तो पता चला कि जिस रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती है वह सुप्रीम कोर्ट के मानक को पूरा नहीं कर रहा है। ऐसे में तत्काल सीएमओ जेएलएम कुशवाहा ने उनसे चार्ज ले लिया और फिर से वहां ताला लटक गया। इस मामले में दोनों अधिकारियों में तनातनी हो गई। मामला अब भी वहीं का वहीं लटका हुआ है।
रोज होते हैं 50 अल्ट्रासाउंड
जिला महिला अस्पताल में बड़ी संख्या में गर्भवती आती हैं। औसतन 50 का अल्ट्रासाउंड हर दिन होता है। शुक्रवार को करीब 11 बजे तक 10 जरूरतमंदों को अल्ट्रासाउंड के लिए अस्पताल से ओपेक चिकित्सालय कैैली भेजा जा चुका था और कई ने अल्ट्रासाउंड के नाम पर कैैली तक जाने से मना करते हुए निजी सेंटरों पर अल्ट्रासाउंड करा कर डॉक्टर को रिपोर्ट दी।
बोले तीमारदार
पाकरडांड निवासी पवन कुमार अपनी पत्नी को दिखाने आए थे। डॉक्टर ने उन्हें अल्ट्रासाउंड की सलाह देते हुए ओपेक चिकित्सालय कैली जाने की सलाह दी। बोले उतनी दूर कौन जाएगा यहीं आसपास किसी प्राइवेट सेंटर पर ही अल्ट्रासाउंड करा लेते हैं। महिला अस्पताल में संसाधन होते हुए भी यह हालत है।
नगर क्षेत्र के सलिल सिंह अपने परिवार के साथ अस्पताल आए थे। यहां डॉक्टर ने इन्हें भी अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। सलिल ने आरोप लगाया कि जिम्मेदारों की मिलीभगत से प्राइवेट सेंटर चल रहे हैं। इसीलिए जिम्मेदार किसी की तैनाती यहां नहीं कर रहे हैं।
बोले सीएमओ
सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने कहा कि एडी हेल्थ ने जो रेडियोलॉजिस्ट वहां तैनात किया था। वह नियमानुसार अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित ही नहीं कर सकते। क्योंकि ऐसे मामले में 14 फरवरी 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है। अब उस मानक के अनुरूप किसी डॉक्टर की तैनाती होगी तभी संभव है कि सेंटर संचालित हो सके।