करीब दो माह से आवेदक परेशान, अनुरोध संख्या जनरेट होने के बाद भी नहीं जमा कर पा रहे शुल्क
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पुलिस के सीसीटीएनस सिटीजन पोर्टल से चरित्र प्रमाणपत्र बनाया जाता है। इसे बनवाने में करीब दो माह से आवेदकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, पोर्टल पर आवेदन कर सब्मिट करने के बाद ऑनलाइन शुल्क जमा करने का कॉलम नहीं खुल रहा है। ऐसे में आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है।
अब यूपीकाॅप एप या क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग एंड नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) पोर्टल के माध्यम से चरित्र प्रमाण पत्र बनाया जाता है। आवेदन के बाद ही अनुरोध संख्या जनरेट हो जाती है। इसके बाद चरित्र प्रमाण पत्र डीसीआरबी, थाना और एलआईयू के कार्यालय में संबंधित अधिकारी को दिखाई देने लगता है। करीब दो माह से पोर्टल पर आवेदन करने के बाद अनुरोध संख्या तो मिल जा रही है लेकिन, शुल्क भुगतान प्रक्रिया पूरी न होने के चलते यह पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक अग्रसारित नहीं हो पा रहा है।
इस पोर्टल से दो प्रकार के प्रमाण पत्र सामान्य और ठेकेदारी में उपयोग करने के लिए बनाए जाते हैं। सबसे ज्यादा आवेदन सामान्य चरित्र प्रमाण पत्र के लिए होता है। इसके लिए आवेदक को ऑनलाइन 50 रुपये का शुल्क अदा करना होता है। यह प्रमाण त्र नए ट्रक व बस चालकों के लिए बहुत उपयोग होता है। क्योंकि बिना प्रमाण पत्र के वाहन स्वामी नए चालकों को नौकरी पर नहीं रखते हैं।
इसके अलावा निजी कंपनियों, सरकारी सेवाओं, शराब व उर्वरक व्यवसाय, सेना आदि में भी उपयोगी है। बिना चरित्र प्रमाण के ठेकेदार को कार्यदायी संस्थाएं ठेका आवंटित नहीं करती हैं। करीब दो माह से आवेदन न हो पाने से लोग परेशान हैं।
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हम ट्रक चालक चलते हैं, किसी कंपनी से ट्रक में माल लोड करने के लिए पुलिस द्वारा बनाए गए चरित्र प्रमाणपत्र की जरूरत पड़ती है। अप्रैल माह से इसे बनवाने का प्रयास कर रहा हूं, पोर्टल से आवेदन संख्या मिल जा रही है लेकिन शुल्क भुगतान न होने से आवेदन प्रकिया पूरी नहीं हो पा रही है।
ज्ञानेंद्र कुमार चतुर्वेदी, खखोड़ा
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चरित्र प्रमाणपत्र के लिए दो माह से परेशान हूं। करीब 13 बार आवेदन कर चुका हूं। हर बार पोर्टल से अनुरोध संख्या जनरेट हो जाती है। इसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। कई बार शुल्क जमा करने का प्रयास कर चुका हूं लेकिन हर बार असफल रहा।
उपेंद्र कुमार, कलवारी
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कोट
सीसीटीएनएस पोर्टल पुलिस की ओर से संचालित किया जाता है। इसका संचालन एनआईसी से नहीं किया जाता है। फिर भी यदि आवेदन में दिक्कतें आ रही हैं तो वह शिकायत करें, समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा।
आलोक मिश्र, डीआईओ, एनआईसी