सरयू, कुआनो समेत जिले की कई नदियां उफनाई, 28 गांव बाढ़ की चपेट में
संवाद न्यूज एजेंसी
विक्रमजोत/दुबौलिया। जिले में सरयू नदी के साथ कुआनो, मनवर, मनोरमा और कठिनईया नदी उफान पर हैं। इससे तटवर्ती गांवों के लोग परेशान हैं। कहीं मवेशियों के लिए हरा चारा नहीं मिल रहा है तो कहीं नाव के सहारे ग्रामीण दैनिक जरूरतें पूरी कर रहे हैं। एडीएम अभय मिश्रा के अनुसार, जिले के 28 गांव बाढ़ प्रभावित हैं। यहां प्रशासन की ओर से लोगों को मदद पहुंचाई जा रही है।
विक्रमजोत प्रतिनिधि के अनुसार, अपस्ट्रीम में बढ़ रहे जलस्तर से क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। तटबंध विहीन गांवों व तटवर्ती लोग सहमे हुए हैं। ब्लॉक क्षेत्र के भरथापुर व कल्यानपुर चारों ओर से पानी से घिर गए हैं। केंद्रीय जल आयोग अयोध्या ने बताया कि रविवार को जलस्तर खतरे के निशान 92.73 से 40 सेंटीमीटर ऊपर यानी 93.13 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर और बढ़ने की संभावना भी जताई गई है। नदी का पानी घघौवा पुल के रास्ते हाइवे के उस पार गांवों में पहुंचने लगा है। पड़ाव, चानपुर, संदलपुर आदि गांवों के किनारे तक पानी पहुंच गया है। कल्यानपुर प्रधान प्रतिनिधि अभिषेक शर्मा सहित हेमंत पांडेय, जितेंद्र सिंह, संजय आदि ने बताया कि रास्ते जलमग्न हो चुके हैं। जल्द ही पानी घरों में पहुंचने लगेगा। मवेशियों के लिए हरे चारे का संकट पैदा हो गया है। राजस्व निरीक्षक राम सागर यादव ने बताया कि बाढ़ चौकियों के सहारे नदी की निगरानी की जा रही है।
विक्रमजोत प्रतिनिधि के अनुसार, सरयू का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। जिसे देखकर ग्रामीणों को बाढ़ की चिंता सताने लगी है। ग्रामीणों ने बताया कि यदि ऐसे ही जलस्तर बढ़ता रहा तो कल्यानपुर, भरथापुर, पड़ाव, चानपुर, संदलपुर आदि गांवों में जलभराव हो जाएगा।
दुबौलिया प्रतिनिधि के अनुसार, सरयू का जलस्तर बढ़ने से अति संवेदनशील तटबंध कटरिया-चांदपुर व गौरा-सैफाबाद पर पानी का तेज दबाव बना हुआ है। संवेदनशील जगहों पर बाढ़खंड निगरानी कर रहा है। बाढ़ से सुविखा बाबू व आंशिक टेढवा घिर गए हैं जबकि सतहा, बलूईया, विशुनदासपुर की अनुसूचित बस्ती, खजांचीपुर गांव का एक पुरवा व भुवरिया गांव की ओर पानी तेजी से बढ़ रहा है। माझा क्षेत्र में पशुपालकों को हरे चारे के संकट का सामना करना पड़ रहा है। एसडीओ जितेंद्र कुमार ने बताया की जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है तटबंधों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। हालांकि अभी खतरे जैसे हालात नहीं हैं।
लालगंज प्रतिनिधि के अनुसार, कुआनो व मनवर नदी का जलस्तर बढ़ने से कुदरहा ब्लॉक क्षेत्र के खखरा जगरनाथपुर, अमानाबाद, रोवा गोवा, चंदरपुर, विजवलिया, टिटिहरी बभनी, मसूरिहा कछुआड़े, गोनार लगुनी, बारीघाट, बरतानिया के किसानों की फसलें जलमग्न हो गई हैं। किसान राकेश पाल, राम दत्त शर्मा, पुरुषोत्तम पांडेय, अजीत पाल आदि ने बताया कि फसलें खराब हो रही हैं। अभी तक प्रशासन ने सुध नहीं ली है। बहादुरपुर प्रतिनिधि के अनुसार ब्लॉक क्षेत्र के मनोरमा नदी का जलस्तर बढ़ने से डारीडिहा, सेमरापुरे प्रसाद, जिगिनिया, खरिकाभारी, खलीलपट्टी, पठानपुर, बबुरहिया, करमी बुजुर्ग, मकदूमपुर, लक्षिमनपुर, गुलहरिया, भैसहटी आदि गांवो चारों ओर से पानी से घिर गए हैं। अनिल चौधरी, बाबूराम, प्रेमसागर, शेरअफगन, शबील, दीपक सिंह, संतोष सिंह ने बताया कि पानी भरने से फसलें खराब हो रही हैं। विधायक रवि सोनकर ने बताया कि पानी भरने से नुकसान का आंकलन लेखपाल से कराया जा रहा है। बनकटी प्रतिनिधि के अनुसार, कठिनईया व कुआनो नदी का जलस्तर बढ़ने से मुबारकपुर, धुसवा, पगार, देवखर, गोविंदपुर, कमोखर, धुसवा गांव के किसानों की सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न हो गई हैं। अमरजीत यादव, अशोक कुमार, रामदुलारे, चंद्रभान आदि ने बताया कि पानी भर जाने से फसलें खराब हो रही हैं। एसडीएम सदर पवन जायसवाल ने बताया कि पानी भरने से नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। गौर प्रतिनिधि के अनुसार कुआनों का जलस्तर बढ़ने से आईला और पगारे गांव पानी की चपेट में आ गए हैं। किसान विश्वनाथ, वीरेंद्र कुमार, ईश्वरदीन, गोमती आदि ने बताया कि धान व गन्ने की फसलें जलमग्न हो गई हैं। नाव के सहारे गांव के लोगों की जरूरतें पूरी हो रही हैं। प्रधान रामकेश वर्मा ने बताया कि हर साल बारिश में बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ती है। तहसीलदार हर्रैया चंद्रभूषण प्रताप ने बताया कि बाढ़ की चपेट में आने वाले गांवों की निगरानी के स्थानीय लेखपाल और कानूनगो से कराई जा रही है। जरूरत के हिसाब से सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
एसडीएम ने बाढ पीड़ितों का जाना हाल
दुबौलिया। एसडीएम हर्रैया सुखबीर सिंह ने रविवार को बाढ़ से घिरे सुविखाबाबू गांव निवासियों से मिलकर उनका हाल जाना। दोपहर बाद कटरिया-चांदपुर तटबंध पहुंचे एसडीएम ने कटरिया गांव के पास ग्रामीणों की समस्याएं जानी। उन्होंने बताया कि बाढ़ पीड़ित गांवों के लोगों को आने जाने के लिए छह नावें लगाई गई हैं। पशुपालकों में भूसा उपलब्ध कराया जा रहा है।