जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती मरीज संवाद
बस्ती। शीतलहर और सर्द पछुआ हवाओं ने ठंड के साथ गलन बढ़ा दी है। जैसे-जैसे पारा गिर रहा है, बच्चे और बुजुर्गों को सर्दी-खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी हो रही है। लोग जिला अस्पताल पहुंचकर परामर्श लेकर जांच करा रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, ठंड के मौसम में कोल्ड व डायरिया की बीमारी सबसे ज्यादा खतरनाक है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि बच्चे की सांस तेज चल रही हो, सांस लेने में घरघराहट, शरीर शिथिल पड़ने लगे तो यह निमोनिया के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत बच्चे को चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। जिला अस्पताल की ओपीडी में बृहस्पतिवार को 851 मरीज पहुंचे। बाल रोग की ओपीडी में 145 बच्चे पहुंचे। मेडिसिन विभाग और चेस्ट रोग विभाग में अधिकांश मरीज सांस संबंधी तकलीफ से परेशानी थे।
चार दिन से बढ़ी ठंड के कारण वायरल संक्रमण के साथ बुजुर्गों में सांस फूलने की समस्या बढ़ी है। जुकाम के बाद सीने में कफ जमने से सांस लेने में परेशानी हो रही है। फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी ने बताया कि ठंड को देखते हुए अस्थमा मरीजों को सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि अस्थमा मरीज हमेशा गुनगुना पानी का सेवन करें, सुबह शाम गर्म कपड़े पहनें और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ का सेवन करे।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने बताया कि कोल्ड डायरिया से बचाने के लिए बच्चों को गीले बिस्तरों से बचाएं, दूध गुनगुना करके ही दें, उबला हुआ पानी पिलाएं, अच्छी तरह गर्म कपड़े पहनाकर रखें।