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जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के लिए बढ़ी सियासी सरगर्मी

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जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के लिए बढ़ी सियासी सरगर्मी
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बस्ती। अधिसूचना जारी होने के साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव की सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। सत्तारुढ़ दल भाजपा, समाजवादी पार्टी से लेकर बहुजन समाज पार्टी में गोपनीय बैठकों का दौर भी तेज हो गया है।
इसके पीछे तीनों प्रमुख दलों के सामने जिताऊ उम्मीदवार तलाशने की चुनौती है, जिसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि किसी भी दल के पास बहुमत का आंकड़ा नहीं है। इसके बाद भी तीनों ही दलों से दो से तीन दावेदार मैदान में जीत का समीकरण हल कर जुगत में कई दिनों से लगे हैं।
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राज्य निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के मुताबिक, मंगलवार से लेकर तीन जुलाई के बीच जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव संपन्न करा लिया जाना है। हालांकि इसे लेकर भी जिलाधिकारी की ओर से अधिसूचना जारी की जानी है, जिसके बाद ही जिले में चुनाव कार्यक्रम की स्थिति स्पष्ट होगी। मगर राजनीतिक दल अध्यक्ष की कुर्सी हथियाने के लिए तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। सत्तारूढ़ दल भाजपा की बात करें तो यहां जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी का बीस साल का वनवास खत्म करने की चुनौती है। हालांकि पार्टी के समर्थन से जीत कर आए जिला पंचायत सदस्यों की संख्या महज नौ ही है, लेकिन भाजपा जिलाध्यक्ष महेश शुक्ल का दावा है कि कई निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य उनके संपर्क में हैं।
हालांकि इससे पहले सवाल पार्टी उम्मीदवार की घोषणा है, जिसके लिए पार्टी के प्रदेश मुख्यालय की हरी झंडी का इंतजार किया जा रहा है। चर्चाओं के मुताबिक भाजपा के समर्थन से रामनगर द्वितीय से जीत कर आए संजय चौधरी, कुदरहा द्वितीय से जीत कर आए रामचंद्र वर्मा और कप्तानगंज द्वितीय से जीत कर आए प्रमोद चौधरी उर्फ गिल्लम को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए दावेदार माना जा रहा है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि तीन लोगों ने दावेदारी पेश की है, उम्मीदवार के नाम की घोषणा पार्टी नेतृत्व करेगा। वहीं, सपा जिलाध्यक्ष महेंद्र यादव जिला पंचायत अध्यक्ष पद के दावेदारों के नाम से पर्दा हटाने से बचते दिखे।
उन्होंने कहा कि अभी तक पार्टी के समर्थन से जीत कर आए दो जिला पंचायत सदस्यों ने दावेदारी पेश की है, जिनके नाम प्रदेश अध्यक्ष को भेज दिए गए हैं। वहां से नाम नाम तय होने के बाद ही आगे की रणनीति को उजागर किया जाएगा। बसपा जिलाध्यक्ष जयहिंद गौतम ने कहा कि पार्टी के समर्थन से जीत कर आए तीन जिला पंचायत सदस्यों ने अध्यक्ष पद की दावेदारी की है, लेकिन पार्टी हाईकमान से तय होना है कि कौन उम्मीदवार होगा।
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यह है पार्टी समर्थित सदस्यों का अंकगणित
जिला पंचायत का सदन 43 सदस्यों का है। अध्यक्ष पद की कुर्सी पर आसीन होने के लिए कम से कम 22 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है। जबकि बीते दिनों हुए चुनाव में भाजपा के समर्थन से नौ, सपा के समर्थन से 16, कांग्रेस से एक, बसपा से छह, भासपा से दो, भीम आर्मी के समर्थन से एक जिला पंचायत सदस्य को ही जीत मिली है। वहीं, आठ सदस्य निर्दलीय हैं। जाहिर है आंकड़ों में बहुमत किसी के पास नहीं है।
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