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महिला चिकित्सक का पद खाली, स्टाफ नर्स व एएनएम के सहारे प्रसव

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दो दशक से स्थायी महिला डॉक्टर से महरूम है सीएचसी
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भानपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भानपुर की स्थापना के 21 वर्ष बाद भी अस्पताल में किसी स्थायी महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं हो सकी है। यहां की गर्भवती महिलाओं की जांच पुरुष चिकित्सकों और प्रसव की व्यवस्था स्टाफ नर्स और एएनएम के सहारे संचालित हो रही है।
अस्पताल में यदि किसी महिला चिकित्सक को तैनाती की भी गई तो वह कुछ ही दिनों में जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दी गईं या उन्होंने अपना तबादला कर लिया। जिसमें वर्ष 2019-20 में डॉ.एलीना द्विवेदी और वर्ष 2020-21 में डॉ. रूपम कुमारी का नाम शामिल है जो यहां तैनाती के कुछ ही दिन में वापस चली गईं। भानपुर में स्थापित सीएचसी का लोकार्पण वर्ष 19 अक्तूबर 2001 को किया गया था। तब क्षेत्र के लोगों को यहां बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलने की आस जगी थी। लेकिन, दो दशक से अधिक का समय बीतने के बाद भी यहां किसी स्थायी महिला मेडिकल अफसर की तैनाती नहीं हो सकी। जिसको लेकर जिम्मेदारों ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई।
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सीएचसी में होने वाले प्रसव रिकार्ड पर गौर करें तो यहां हर माह 200 से 250 प्रसव की रिपोर्ट दर्ज है। जो स्टाफ नर्स और एएनएम के सहारे कराए जाते हैं। प्रसव का कार्य देख रही स्टाफ नर्स संगीता वर्मा ने बताया कि यहां सामान्य प्रसव ही कराया जाता है। प्रसव के समय यदि कोई परेशानी आती है तो उन्हे तुरंत जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। बताया कि इस कार्य के लिए तीन स्टाफ नर्स और दो एएनएम की ड्यूटी शिफ्टवार लगती है।
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सीएचसी अधीक्षक डॉ. सचिन कुमार चौधरी ने बताया कि अस्पताल में कोई स्थायी महिला चिकित्सक नहीं हैं। पीएचसी करमहिया में तैनात डॉ. शिल्पी पटेल और सीएचसी की महिला आयुष चिकित्सक डॉ. पल्लवी चौधरी से मदद ली जाती है। यहां स्थायी महिला चिकित्सक की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत भी कराया गया है।
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