बस्ती। छठ पूजा के लिए परदेशी अब गांव आ रहे हैं। दिल्ली-मुंबई से आने वाली ट्रेनें यात्रियों से फुल होकर चल रही हैं। स्टेशन पर इन ट्रेनों के रुकते ही लौटने वाले यात्रियों से प्लेटफार्म भर जा रहा हैं। सामान से लदे यात्री यहां से घर की ओर रुख कर रहे हैं। टैक्सी चालकों में इन यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने की होड़ मच जा रही है। दिल्ली और मुंबई से आने वाली एक दर्जन ट्रेनें नो-रूम होकर चल रही हैं। रोडवेज बसों का भी यही हाल हैं। तीन दिनो के भीतर दिल्ली से बीएस- 6 मॉडल की 15 बसें फुल होकर लौटी हैं।
छठ पूजा के लिए यात्रियों की आवाजाही बढ़ गई हैं। जो लोग दिवाली से पहले घर पहुंचे, उनमें से अधिकांश छठ पूजा के बाद ही लौटने का मन बनाए हैं। वहीं नौकरी पेशा या महानगरों में रहकर पढ़ाई करने वाले को लौटना पड़ रहा है। हालांकि, परदेश जाने वालों की संख्या अभी लौटने वालों की अपेक्षा कम हैं। डाउन ट्रेनों में भीड़ ज्यादा देखी जा रही है। जनरल , स्लीपर एवं एसी कोच सब फुल चल रहा हैं।
डाउन ट्रेनों में गोरखधाम, सप्तक्रांति, हमसफर, वैशाली आदि सुपरफास्ट ट्रेनें फुल होकर लौट रही हैं। डाउन ट्रेनों के ठहराव पर स्टेशन यात्रियों की हलचल बढ़ जा रही हैं। वहीं मुंबई, दिल्ली के लिए ट्रेनों में 20 नवंबर तक सीटें खाली मिल रही हैं। इस अवधि में जाने वालों को कंफर्म टिकट मिल रहा हैं। रेलवे अधिकारियों का मानना हैं कि 21 नवंबर से छठ पूजा के बाद मुंबई, दिल्ली, गुजरात जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ जाएगी।
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दिल्ली तक दौड़ रही रोडवेज की छह बसें
यात्रियों को लाने और ले जाने के लिए रोडवेज डिपो की बीएसए- 6 मॉडल की कुल छह बसें लगाई गई हैं। प्रतिदिन यहां से तीन बसें दिल्ली के लिए जा रही है और तीन लौट भी रही हैं। अभी जाने वाली बसों में पर्याप्त यात्री नहीं बैठ रहे हैं जबकि उधर से आने वाली बसें यात्रियों से भरकर आ रही हैं। छठ पूजा की वजह से दीवाली के ठीक बाद यात्रियों की आवक बढ़ गई हैं। तीन दिनों के भीतर दिल्ली से 15 बसें यात्रियों से फुल होकर लौटी हैं। यह क्रम अभी तीन दिनों तक जारी रहने की उम्मीद हैं।
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पहले से रिजर्वरेशन कराए थे वरना यात्रा आसान नहीं थी। ट्रेन में बहुत भीड़ हैं। सीट आरक्षित है इसलिए गनीमत हैं। फिर भी परेशानी उठानी पड़ रही हैं। हमें कोलकाता तक सफर करना हैं।
दशरथ भौमिक, यात्री।
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तमाम लोग सीट न मिलने की वजह से फर्श पर ही यात्रा कर रहे हैं। महिलाओं, बच्चों को ज्यादा परेशानी हो रही हैं। त्योहारों के सीजन में स्पेशल ट्रेनें चलाई जानी चाहिए। ठसाठस भीड़ में लंबा सफर कष्टदाई बन जाता है।
पंकज कुमार, यात्री।