‘सुर साधकों को प्रेरणा देती रहेंगी स्वर कोकिला लता मंगेशकर’
बस्ती। भारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर सुर साधकों को अनंत काल तक प्रेरणा देती रहेंगी। उन्होंने शरीर का त्याग किया है। लेकिन, 25 हजार गीतों के जरिए उनकी आवाज हमेशा जीवित रहेगी।
पं. ज्वाला प्रसाद संगीत सेवा संस्थान में रविवार को लता मंगेशकर के निधन पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में संगीत शिक्षक दिग्विजय नाथ मिश्र ने यह बात कही। वहीं, राजेश आर्य ने कहा कि लता मंगेशकर ने अपना पूरा जीवन संगीत के लिए समर्पित कर दिया। 92 वर्ष की आयु में उनका निधन मुंबई के एक अस्पताल में हो गया। संगीत जगत की सिरमौर, देश की शान लता मंगेशकर भारत रत्न से भी सम्मनित की गई थीं। संगीत साधकों के लिए लता मंगेशकर एक प्रेरणा थीं। अपने जीवन में 25,000 से अधिक गीतों को आवाज देने वाली लता मंगेशकर देश के तमाम सम्मान से सम्मानित की गई हैं। लता की आवाज ब्रह्मांड में सदैव गूंजती रहेगी। विनोद कुमार उपाध्याय, संतोष श्रीवास्तव, मास्टर शिव, फैशल ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि ख्यातिप्राप्त स्वर कोकिला लता मंगेशकर के निधन से संगीत जगत को गहरा आघात पहुंचा है। जिसकी पूर्ति कभी नहीं हो सकती और आने वाली पीढ़ियां उन्हें कभी नहीं भुला पाएंगी।
श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में रत्नेश कुमार, रणविजय, आदर्श मिश्रा, उत्कर्ष श्रीवास्तव, नीलू, अपर्णा श्रीवास्तव, आफताब आलम, शैलेष, पंकज, ऋषभ श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।